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जमीन घोटाले पर लालू की सफाई, नहीं चाहता गरीब रहें मेरे बेटे

लालू की दलील थी कि उनके परिवार को कारोबार करने का पूरा हक है और वो नहीं चाहते कि उनके बेटे गरीबी में जिंदगी बिताएं. 2 एकड़ के इस प्लॉट की कीमत करीब 60 करोड़ है और इसमें 500 करोड़ की लागत से मॉल बनाने का काम आरजेडी के ही राज्यसभा सांसद प्रेम गुप्ता कर रहे हैं.

तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के साथ लालू यादव (फाइल) तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के साथ लालू यादव (फाइल)

बिहार में बीजेपी ने लालू के दोनों मंत्री बेटों पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं और ऐसे ही आरोपों के चलते चुनाव लड़ने की पाबंदी झेल रहे आरजेडी सुप्रीमो उनके बचाव में उतर आए हैं. रविवार को लालू ने माना कि पटना के पास जिस जमीन पर बिहार का सबसे बड़ा मॉल बन रहा है उसमें राबड़ी देवी के अलावा तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव की भी हिस्सेदारी है.

लालू की सफाई
लालू की दलील थी कि उनके परिवार को कारोबार करने का पूरा हक है और वो नहीं चाहते कि उनके बेटे गरीबी में जिंदगी बिताएं. 2 एकड़ के इस प्लॉट की कीमत करीब 60 करोड़ है और इसमें 500 करोड़ की लागत से मॉल बनाने का काम आरजेडी के ही राज्यसभा सांसद प्रेम गुप्ता कर रहे हैं. लालू ने बताया, ' निर्माणाधीन मॉल में आधी हिस्सेदारी बिल्डर की है जबकि बाकी आधा शेयर उनकी LARA नाम की कंपनी का है. ये नाम लालू और राबड़ी के नाम के पहले अक्षरों को मिलाकर बना है.

बीजेपी का आरोप
पिछले हफ्ते बीजेपी के सीनियर नेता सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया था कि बिहार की नीतीश सरकार ने ये जमीन गैर-कानूनी तरीके से लालू के परिवार को सौंपी थी. मोदी के मुताबिक साल 2008 में जब लालू रेल मंत्री थे, हर्ष कोचर नाम के बिजनेसमैन को पुरी और रांची में रेलवे के लिए 2 होटल लीज पर चलाने का ठेका मिला था. लेकिन इस कॉन्ट्रेक्ट से पहले कोचर ने ये विवादित प्लॉट प्रेम गुप्ता को बेचा था. बीते सालों में कंपनी में ऐसे बदलाव किए गए जिनके चलते LARA कंपनी में सिर्फ लालू के बेटे और पत्नी ही निदेशक बचे रह गए. बीजेपी की मानें तो लालू के बेटे मॉल के प्रोजेक्ट के लिए बेनामी लेनदेन का सहारा ले रहे हैं.

क्यों घोषित नहीं की संपति?
सुशील मोदी ने सवाल पूछा था कि लालू के मंत्री बेटों ने अपनी घोषित जायदाद में इस प्लॉट का जिक्र क्यों नहीं किया था? उन्होंने ये आरोप भी लगाया था कि पटना के चिड़ियाघर ने तेज प्रताप यादव के कब्जे वाली जमीन से 44 लाख में मिट्टी खरीदी थी. इसके बाद नीतीश सरकार ने मामले की जांच का आदेश दिया था.

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