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पीएम मोदी को खत लिखने वाली 49 हस्तियों को राहत, रद्द होगा केस

यह आदेश मुजफ्फरपुर के एसएसपी मनोज कुमार ने दिया है. दरअसल, पीएम मोदी को खत लिखने वाले 49 सेलिब्रिटीज के खिलाफ मुजफ्फरपुर में FIR दर्ज करवाई गई थी. इसमें रामचंद्र गुहा, मणिरत्नम, अनुराग कश्यप जैसे लोग शामिल थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो (ANI) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो (ANI)

  • केस रद्द करने का आदेश मुजफ्फरपुर के एसएसपी मनोज कुमार ने दिया
  • 49 हस्तियों ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं को तुरंत रोकने की मांग की थी

मॉब लिंचिंग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखने वाली 49 हस्तियों को राहत मिली है. बिहार पुलिस ने रामचंद्र गुहा, मणिरत्नम समेत 49 हस्तियों पर दर्ज केस को रद्द करने का आदेश दिया है. यह आदेश मुजफ्फरपुर के एसएसपी मनोज कुमार ने दिया.

दरअसल, पीएम मोदी को खत लिखने वाले 49 सेलिब्रिटीज के खिलाफ मुजफ्फरपुर में FIR दर्ज करवाई गई थी. इसमें रामचंद्र गुहा, मणिरत्नम, अनुराग कश्यप और अपर्णा सेन जैसे सेलेब्स शामिल हैं, जिन्होंने पीएम मोदी को मॉब लिंचिंग पर चिंता जताते हुए खुला खत लिखा था.

आजतक से बात करते हुए एसएसपी मनोज कुमार ने कहा कि इस पूरे मामले की तफ्तीश की गई और पाया गया कि सभी 49 लोगों के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं वह निराधार है. जांच के आधार पर पुलिस ने इन सभी लोगों के खिलाफ देशद्रोह, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और देश की गरिमा को धूमिल करने जैसे आरोपों में क्लीनचिट दे दिया.

एसएसपी मनोज कुमार ने कहा कि इस मामले में अब पुलिस कोर्ट में याचिकाकर्ता सुधीर ओझा के खिलाफ आईपीसी की धारा 182 और 211 के तहत मुकदमा चलाने की अपील करेगी, क्योंकि उन्होंने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए इन सभी के खिलाफ शिकायत कोर्ट में दर्ज कराई थी.

क्या है मामला?

वकील एस. के. ओझा ने मुजफ्फरपुर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के बाद इन सेलिब्रिटियों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जारी किया गया था.

याचिका में करीब 50 सेलिब्रिटियों के नाम आरोपी के तौर पर शामिल किए गए, जिसमें उनकी ओर से कथित तौर पर देश की छवि को धूमिल करने और प्रधानमंत्री के प्रभावशाली प्रदर्शन को कमजोर करने की बात कही गई थी. इसके साथ ही याचिका में उनकी ओर से अलगाववादी प्रवृत्तियों का समर्थन करने की बात भी कही गई.

अपने खुले पत्र में सेलिब्रिटियों ने मुस्लिम, दलित और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं को तुरंत रोकने की मांग की थी. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि बिना विरोध के कोई लोकतंत्र नहीं होता है.

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