गृह मंत्री ने ये बातें आइमा (ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन) के नेशनल मैनेजमेंट कंवेंशन के दौरान कहीं. अमित शाह का कहना था कि रामायण केवल एक चरित्र की घटना नहीं है. मानवीय जीवन के सारी ऊंचाइयों को भूले बगैर जीवन को रेखांकित करने का काम महर्षि वाल्मीकि ने किया है. उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने आने वाले समय में पतन के कारणों को भी इंगित किया है.
अमित शाह ने कहा कि महाकाव्य में राजा के कर्तव्यों का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया गया है. राजा के द्वारा धैर्य के साथ अपने पिता की बात मानने के लिए कितना बलिदान, कितना त्याग किया जा सकता है यह भी दर्शाया गया है. उन्होंने कहा कि राजा राम ने पूरा जीवन मर्यादा में रहकर जिया. राम के जीवन को काव्य स्वरूप में देने का काम महर्षि वाल्मीकि ने किया है. उनका कहना था कि दुनिया की सभी भाषाओं में रामायण का भावानुवाद हुआ है.
अमित शाह ने यह भी कहा कि यह केवल संस्कृति की उद्घोषणा करने वाला, आदर्श जीवन को समझाने वाला काव्य नहीं है बल्कि इसके अंदर कई ऐसे संवाद है जो नीतिशास्त्र, प्रशासन, युद्ध शास्त्र तथा ज्ञान विज्ञान का भी परिचय देते हैं.
शाह ने कहा कि रामायण से ज्ञात होता है कि जब स्त्री की मर्यादा का लोप होता है तब राज्य का लोप होता है, संस्कृति का लोप होता है. उन्होंने गांधीजी का जिक्र करते हुए कहा कि जब काका साहेब कालेलकर के कहने पर कौटिल्य के नीतिशास्त्र की प्रस्तावना एक वाक्य में लिखना था तब गांधी जी ने लिखा था यह ग्रंथ नहीं है महाग्रंथ है.
अमित शाह ने कहा कि इसी तरह रामायण को पढ़ने के बाद व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक जीवन तथा देश की सारी समस्याओं का समाधान इसमें मिल सकता है. उन्होंने कहा कि रामायण भाषाओं की मर्यादा लांघकर भारतीय संस्कृति की राजदूत बनकर अनेक देशों में पहुंची है.