भारतीय सेना ने राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में एम-777 होवित्जर तोपों के जरिए सटीक निशाने को भेदने में कामयाबी हासिल की है. यह परीक्षण सोमवार को किया गया, जिसका वीडियो सेना ने आज जारी किया है.
अमेरिका से मिलीं एम-777 होवित्जर तोपों के जरिए एक्सकैलिबर गाइडेड गोले-बारूद निशाने को बेहद सटीक तरीके से भेदने में सक्षम रहे.
Pictures of impact of Excalibur ammunition on targets today. The holes on rooftop show concrete penetration capability of the ammunition which can be fired only from M-777 howitzers. The ammunition was fired at both concrete and sand bunkers. (Image source: Indian Army sources) https://t.co/XkM13jitXS pic.twitter.com/d9LnKxuBe4
— ANI (@ANI) December 10, 2019
इन गोलों के जरिए किसी खास जगह को निशाना बनाकर सटीकता से हमला किया जा सकता है. सेना के इस परीक्षण में इन खास बमों ने दीवारों को 8 से 10 इंच तक भेद दिया. ऐसे में जब इन्हें दुश्मनों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा तो आम नागरिकों की जान को खतरा कम होगा.
बता दें कि नवंबर 2016 में भारत का अमेरिका के साथ करार हुआ था. इसमें तय हुआ कि भारतीय सेना के लिए 145 M777 बनाए जाएंगे. इनकी कुल लागत 5,070 करोड़ रुपये होगी.इसके बाद नवंबर 2018 में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने सेना की क्षमता बढ़ाने के क्रम में वैश्विक स्तर पर प्रमाणित बेजोड़ मारक क्षमता वाले तीन हथियार राष्ट्र को समर्पित किए थे. इसके तीन दशक पहले देश को बोफोर्स हॉवित्जर तोपें मिली थीं.
30 किलोमीटर मारक क्षमता
सेना कुल 145 एम-777 और 100 के-9 तोपें खरीदेगी, जिनकी आपूर्ति 2020 तक होगी और इनकी लागत क्रमश: 5,070 करोड़ रुपये और 4,366 करोड़ रुपये होगी.
30 किलोमीटर मारक क्षमता वाली एम-777 तोप को हेलीकॉप्टर और सर्विस एयरक्राफ्ट से ले जाया जा सकता है. इस प्रकार विभिन्न इलाकों में तैनाती के लिए ये उपयुक्त हैं. हॉवित्जर इस समय अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों की सेना में शामिल हैं.
M777 होवित्जर पहाड़ी इलाकों के लिए ज्यादा मुफीद है. ये काफी हल्के वजन की गन्स हैं. M777 का इस्तेमाल इराक और अफगानिस्तान युद्ध में हो चुका है. मैदानी और रेगिस्तानी इलाकों के अलावा इन्हें ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ऊंचाई के इलाकों में ले जाने के लिए हेलिकॉप्टर की जरूरत पड़ेगी.