हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को कहा कि कश्मीर में शांति केवल तभी लौट सकती है अगर सरकार सेना को वापस बुला ले, दमनकारी कार्रवाइयों को बंद कर दे और सभी कैदियों को बिना शर्त रिहा कर दे.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ‘शांति को एक मौका देने’ संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया करते हुए उन्होंने कहा, ‘शांति तब तक नहीं लौटेगी जब तक सरकार सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम को निरस्त नहीं करती, नागरिक इलाकों से सेना और सुरक्षा शिविरों तथा बंकरों को नहीं हटाती और सभी कैदियों को बिना शर्त रिहा नहीं करती.’
उन्होंने कहा, ‘हालांकि कश्मीर मुद्दे का हल केवल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को लागू कर या (भारत, पाकिस्तान और कश्मीरियों को शामिल कर) त्रिपक्षीय वार्ता शुरू कर ही किया जा सकता है.’ मीरवाइज ने कहा कि किसी भी द्विपक्षीय हल से कश्मीर मुद्दे का हल नहीं निकाला जा सकता.
उन्होंने कहा, ‘हमने भारत और पाकिस्तान तथा भारत और कश्मीरी नेताओं (नेशनल कांफ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला) के बीच पूर्व में हुए समझौतों को देखा है. यह बेमानी साबित हुए.’