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जेएनयू में नहीं हो रहा है ओबीसी आरक्षण का पालन

देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों और शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा है.

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{mosimage}देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों और शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण का प्रावधान किये जाने के बावजूद इन स्थानों को भरने के लिये प्रशासन द्वारा पर्याप्त प्रयास नहीं करने के आरोप लगाये जा रहे हैं जबकि जेएनयू के रेक्टर प्रो आर कुमार ने कहा कि इन आरोपों में कोई दम नहीं है.

ओबीसी संपर्क अधिकारी ने किया खुलासा
जेएनयू को ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए केन्द्र सरकार की ओर से वित्तीय अनुदान तो मुहैया करा दिया गया है लेकिन छात्र संगठनों और विश्वविद्यालय के ओबीसी संपर्क अधिकारी का कहना है कि पात्र व्यक्तियों को 27 फीसदी के इस आरक्षण से महरूम रखने के लिए जी-तोड़ कोशिश की जा रही हैं जबकि इस वर्ग को सामान्य वर्ग की हकमारी के बिना आरक्षण प्रदान करने के लिये यूनिवर्सिटी की सीटों में इजाफा भी किया गया है.

प्रशासन ने दी न्‍यायालय के नियमों का पालन करने की दलील
प्रो आर कुमार ने कहा कि जेएनयू प्रशासन खाली रह गयी ओबीसी वर्ग की सीटों को भरने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश का पालन करेगा. उच्चतम न्यायालय ने अपने हाल के दिशा-निर्देश में कहा है कि खाली रह गयी ओबीसी वर्ग की सीटों को सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से भरा जाना चाहिए.

शिक्षकों की भर्ती में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं
जबकि जेएनयू में ओबीसी संपर्क अधिकारी प्रमोद कुमार यादव ने केन्द्र के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के निदेशक को एक चिट्ठी लिखी जिसमें उन्होंने जेएनयू में शिक्षकों की भर्ती में ओबीसी आरक्षण कायदे से नहीं देने का मुद्दा उठाया है. उन्होंने लिखा है कि जेएनयू में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर ओबीसी आरक्षण नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कार्मिक विभाग से गुजारिश की है कि बैकलॉग पदों पर बहाली के लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह इतनी मुश्किल से हासिल किए गए आरक्षण का कोई मायने नहीं रह जाएगा. यह बहुत गलत हो रहा है.

यूनिवर्सिटी में 200 सीटें खाली
यादव ने बताया कि जेएनयू में इतने बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती में ओबीसी को बाहर रखा जा रहा है. इस वक्त यहां करीब 200 सीटें खाली पड़ी हैं लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन सिर्फ असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर ओबीसी आरक्षण दे रहा है जबकि कानूनन सभी पदों में 27 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए.

ओबीसी छात्रों के लिए 83 सीटें खाली
उन्होंने कहा कि यही हाल छात्रों के दाखिले में भी है. जेएनयू में छात्रों की अभी 83 सीटें खाली हैं. इस बाबत प्रशासन का तर्क है कि ओबीसी कैटगरी से उपयुक्त छात्र नहीं मिल पाए. ओबीसी आरक्षण के तहत 18 फीसदी सीटें इस समुदाय के छात्रों को दी जानी चाहिए थी जबकि महज 14.2 फीसदी सीटें ही दी गयीं. इसका खामियाजा 83 छात्रों को भुगतना पड़ा.

छात्र संघ ने भी माना, नहीं मिल रहे आरक्षण
जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष संदीप सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं है कि यहां ओबीसी आरक्षण दिया ही नहीं जा रहा. लेकिन, आरक्षण देने का जेएनयू प्रशासन का तरीका मनमाना है. संदीप ने कहा कि भारत सरकार के दिशा-निर्देश के मुताबिक सामान्य वर्ग के लिए पूर्वनिर्धारित कटऑफ अंकों में दस फीसदी तक की छूट ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि 100 अंकों की परीक्षा में 40 अंक को सामान्य वर्ग का कटऑफ अंक माना गया है तो भारत सरकार के दिशा-निर्देश के मुताबिक ओबीसी वर्ग का कटऑफ 30 अंक ही होगा. लेकिन, जेएनयू में इसका पालन नहीं किया जा रहा.

ओबीसी आरक्षण दिए जाने में हो रही धांधली
यही हाल असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर की भर्ती तक में है. ओबीसी आरक्षण दिए जाने में हो रही धांधली के मसले पर प्रमोद यादव का मानना है कि चूंकि सारे पदों पर सीधी भर्ती होनी है लिहाजा सारे पदों पर ओबीसी आरक्षण देना चाहिए. गौरतलब है कि यूपीए सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में केन्द्र सरकार से वित्तीय मदद पा रहे उच्च-शिक्षण संस्थानों में ओबीसी वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था. बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी इस पर अपनी मुहर लगायी थी.

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