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मंगल अभियानः नासा ने भारत को दिया अंतरिक्ष यात्री भेजने का न्योता

मंगल ग्रह पर भेजे गए भारत के पहले अभियान मंगलयान ने बेहद कम लागत में उच्च स्तरीय इंटर-प्लैनेटरी मिशन को अंजाम देने की इसरो की क्षमताओं को दुनिया के सामने ला दिया था.

संयुक्त मंगल अभियान पर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजा जा सकता है संयुक्त मंगल अभियान पर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजा जा सकता है

भारत और अमेरिका मंगल से जुड़ी खोजों के लिए संयुक्त रूप से काम कर सकते हैं. इस संयुक्त अभियान पर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को लाल ग्रह पर भेजा जा सकता है. मंगल ग्रह पर भेजे गए भारत के पहले अभियान मंगलयान ने बेहद कम लागत में उच्च स्तरीय इंटर-प्लैनेटरी मिशन को अंजाम देने की इसरो की क्षमताओं को दुनिया के सामने ला दिया था.

जेपीएल ने भेजा भारत को न्योता
क्यूरोसिटी जैसे रोवरों के जरिए अमेरिका के अधिकतर ग्रह संबंधी रिसर्च में नेतृत्व करने वाली नासा की जेट प्रोपल्शन लैबरेटरी (जेपीएल) के निदेशक चार्ल्स इलाची का कहना है कि भारत और अमेरिका साथ मिलकर मंगल पर रिसर्च कर सकते हैं. उन्होंने लाल ग्रह पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने के लिए भारत को आमंत्रित भी किया है.

अगले दशक में शुरू होगा संयुक्त अभियान
यह पूछे जाने पर कि अमेरिका और भारत दोनों ही एक बार फिर मंगल पर जाने में दिलचस्पी ले रहे हैं? और क्या दोनों देश मंगल पर रिसर्च के लिए एक संयुक्त रोबॉटिक अभियान पर विचार करेंगे? चार्ल्स ने जवाब दिया, 'उम्मीद करते हैं कि भविष्य में ऐसा हो. नासा में हम अगले दशक यानी 2020-2030 में मंगल पर भेजने के अगले अभियान की तैयारी शुरू कर रहे हैं.

संयुक्त अभियान में शामिल होंगे कई देश
इलाची ने बताया कि जल्दी ही वॉशिंगटन में एक बैठक होने वाली है. इसमें मंगल से जुड़े अगले पांच-छह अभियानों में संभावित सहयोगों पर चर्चा हो सकती है. इस बैठक के लिए इसरो को आमंत्रित किया गया है. ऐसा मंगल पर मानवीय अंतरिक्ष विमान भेजने की तैयारी के तहत हो रहा है. हमें निश्चित तौर पर उम्मीद है कि भारत की दिलचस्पी इसमें होगी. उम्मीद है कि भारत, अमेरिका, यूरोप, फ्रांस, इटली और अन्य देशों के संघ का हिस्सा होगा. यहां सभी सौरमंडल के रिसर्च में हमारी क्षमताओं का लाभ ले सकते हैं.

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