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संसद सत्र आज से, 2014 से अटके हैं मोदी सरकार के ये 40 बिल

केंद्र में सरकार संभालने के बाद एनडीए सरकार ने लंबित बिलों में से 12 बिल बहुमत वाले सदन लोकसभा में पारित करा लिए हैं लेकिन राज्यसभा में अबतक यह अटके ही हुए हैं. अगामी चुनावों के देखते हुए संसद का मॉनसून सत्र काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं.

संसद परिसर में पीएम नरेंद्र मोदी (फोटो- Getty Images) संसद परिसर में पीएम नरेंद्र मोदी (फोटो- Getty Images)

संसद का मॉनसून सत्र बुधवार से शुरू होने जा रहा है और इस सत्र में कई अहम बिल लंबित हैं. सत्र के दौरान 40 बिल तो ऐसे हैं जिन्हें मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आने के तुरंत बाद लेकर आई थी लेकिन अभी भी उनके संसद से पारित होने का इंतजार है. मौजूदा माहौल में जब विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को सदन में घेरने की तैयारी कर रहा है इन बिलों का पारित हो पाना मुश्किल लग रहा है.

केंद्र में सरकार संभालने के बाद एनडीए सरकार ने लंबित बिलों में से 12 बिल बहुमत वाले सदन लोकसभा में पारित करा लिए हैं लेकिन राज्यसभा में अबतक यह अटके ही हुए हैं. अगामी चुनावों के देखते हुए संसद का मॉनसून सत्र काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं. पिछले दिनों पूरा बजट सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया था साथ ही कामकाज के लिहाज से 16वीं लोकसभा का रिकॉर्ड काफी खराब ही रहा है.

पारित होगा तीन तलाक बिल?

संसद में इस बार मोदी सरकार की ओर से लाए गए लोकपाल, भूमि अधिग्रहण, व्हिसल ब्लोअर संरक्षण, ट्रांसजेंडर के अधिकार, तीन तलाक, भगोड़ा आर्थिक अपराधी, नदी विवाद से जुड़े बिल लंबित हैं. इनमें से सरकार तीन तलाक और भूमि अधिग्रहण बिल को प्रमुखता से पारित कराने की कोशिश में जुटी है. मुस्लिम महिलाओं से जुड़े इस बिल पर देशभर में सियासी संग्राम भी छिड़ा हुआ है.  

सरकार के लिए राज्यसभा में लंबित विधेयकों को पारित कराना किसी चुनौती से कम नहीं है. यहां पर एनडीए के पास सीमित आंकड़े हैं और उच्च सदन में पिछले दिनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला था. अब सरकार जल्द से जल्द भूमि अधिग्रहण बिल को पारित कराना चाहेगी जिसे लेकर संयुक्त विपक्ष लगातार कड़ा रुख अपनाए हुए है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के 'सूट-बूट की सरकार' वाले तंज से बीजेपी को काफी धक्का लगा है और आगे वह 'कारोबारियों की करीबी' पार्टी होने की छवि से बाहर आकर इस बिल के प्रस्तावित संशोधनों को वापस ले सकती है.

अहम है नागरिकता बिल

नागरिकता से जुड़ा संसोधन बिल भी सरकार की टॉप लिस्ट में है. इस बिल में अवैध रूप से शरणार्थी बनकर भारत में रह रहे लोगों को नागरिकता देने की बात कही गई है. हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के कई लोग पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान से आकर भारत में शरणार्थी के तौर पर बस गए हैं. जबकि बांग्लादेशी शरणार्थियों का मुद्दा भी अहम है. असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इन्हें भारत से निकाले जाने का विरोध भी हो रहा है. इस मामले में विपक्ष बीजेपी पर हिन्दुत्व का एजेंडा थोपने का आरोप लगा रहा है.

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से जुड़ा बिल भी इस मॉनसून सत्र में लंबित है. इसके अलावा एक बार में तीन तलाक को अवैध ठहराना वाले मुस्लिम महिला संरक्षण अधिनियम पर सभी की नजरें टिकी हैं. यह बिल लोकसभा से पारित हो चुका है लेकिन राज्यसभा में अटका पड़ा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि सरकार मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. लेकिन कांग्रेस इसमें साथ देने को तैयार नहीं है जैसा कि शाहबानो के मामले से जुड़ा कांग्रेस का इतिहास है. पीएम ने तो कांग्रेस पर मुस्लिम पुरुषों की पार्टी होने तक का आरोप तक लगाया है. हालांकि इस पर राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा है कि उनके लिए धर्म और जाति के कोई मायने नहीं हैं.

सत्ता पक्ष और विपक्ष में ऐसी तकरार है कि संवाद को कोई रास्ता कायम होना मुश्किल नजर आ रहा है. चुनावी रैलियों के आरोप-प्रत्यारोप सदन के कामकाज पर भारी रहने वाले हैं.  

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