वर्ष 2008 के बेंगलूर विस्फोट मामले का आरोपी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का नेता अब्दुल नासिर मदनी कई साल पहले भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी पर हमले की साजिश में भी आरोपी रह चुका है, लेकिन इस मामले में उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था.
आडवाणी ने इस बात का जिक्र अपने ब्लॉग पर किया है. आडवाणी ने लिखा है, ‘‘मदनी केरल की उग्रवादी मुस्लिम पार्टी पीडीपी का चेयरमैन है, जिसे कांग्रेस और वामपंथी लगातार लुभाने की कोशिश करते रहे हैं. मदनी जब जेल में था, तब केरल विधानसभा में उसकी रिहाई की मांग करते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया गया. न्यायालय ने 2008 के बम विस्फोट कांड के सिलसिले में ही मदनी के विरूद्ध वारंट जारी किया, जिस पर पिछले सप्ताह कर्नाटक पुलिस ने अमल किया.’’ आडवाणी ने लिखा है कि मदनी का नाम उन्हें उनकी जिंदगी की एक न भूलने वाली घटना का स्मरण करा देता है.
बकौल आडवाणी, ‘‘यह घटना फरवरी 1998 में घटी, तब मैं उस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के प्रचार के संबंध में तमिलनाडु गया था. वहां हमारा अन्नाद्रमुक से चुनावी समझौता था. 13 फरवरी को मैं चेन्नई में था. 14 को मुझे सुबह कोयंबतूर और शाम को तिरुचरापल्ली में रैली को संबोधित करना था, जहां जयललिता को भी रैली को संबोधित करना था.’’{mospagebreak}भाजपा नेता ने लिखा है, ‘‘मेरे कोयंबतूर जाने के पहले एक संवाददाता आया और मुझसे साक्षात्कार के लिए आग्रह करने लगा, लेकिन राज्य इकाई द्वारा तए किए कार्यक्रम में फेरबदल की गुंजाइश नहीं थी, क्योंकि तिरुचरापल्ली पहुंचने का मेरा कार्यक्रम अन्नाद्रमुक नेताओं के साथ तय करके बना था.’’
उन्होंने लिखा है, ‘‘लेकिन जिद के आगे मुझे झुकना पड़ा, पर इससे मेरा कार्यक्रम ऐसा बिगड़ा कि मैं दो घंटे से ज्यादा की देरी से कोयंबतूर पहुंचा.’’ आडवाणी के मुताबिक, ‘‘कोयंबतूर हवाईअड्डे पर भारी पुलिस बल को देखकर मुझे आश्चर्य हुआ. वहां एक डरावनी शांति छाई थी. एक अधिकारी ने मुझे बताया कि रैली स्थल पर सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए हैं.’’ उन्होंने लिखा है, ‘‘उन्होंने मुझे बताया कि विस्फोट में लगभग 50 लोग मारे गए हैं और करीब 200 घायल हुए हैं. एक व्यक्ति मानव बम था, जिसने खुद को वहां उड़ा दिया.’’
भाजपा नेता ने अपने ब्लॉग में एक मासिक पत्रिका की मई 1998 की रिपोर्ट के हवाले से लिखा है, ‘‘तमिलनाडु पुलिस के क्राइम ब्रांच क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबीसीआईडी) द्वारा दो महीने की जांच के बाद पता चला है कि उस दिन तीन मानव बम आडवाणी को निशाना बनाए हुए थे. पुलिस ने तीनों की पहचान अमजद अली, मोहम्मद जमेशाह और अमानुल्ला के रूप में की है. तीनों एक मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन अल-उम्मा से संबंधित थे.’’{mospagebreak}आडवाणी ने लिखा है, ‘‘पुलिस के मुताबिक 14 फरवरी के विस्फोट अल-उम्मा द्वारा पूर्व नियोजित थे, जिनकी योजना संगठन के नेता एस ए बाशा ने कोयंबतूर में 1997 में मारे गए 19 मुस्लिमों का बदला लेने के लिए बनाई.’’ आडवाणी ने रिपोर्ट के हवाले से कहा है, ‘‘सूत्रों के मुताबिक अली को आडवाणी को निशाना बनाना था और बाकी दो उसके विकल्प के तौर पर थे, पर योजना इसलिए असफल रही क्योंकि आडवाणी का विमान देर से आया. इस बीच संगठन द्वारा दूसरे स्थानों पर रखे बम फट गए और करीब 50 लोगों की मौत हो गई. कोहराम के बीच अली वहां से फरार हो गया.’’
उन्होंने लिखा है, ‘‘जांच में बम विस्फोट की साजिश का पर्दाफाश हुआ है. साजिश में शामिल चिह्नित किए 167 लोगों में से 110 को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एस ए बाशा और अल-उम्मा का कार्यवाहक अध्यक्ष ताजुद्दीन शामिल है.’’ आडवाणी ने लिखा है, ‘‘पुलिस के मुताबिक ताजुद्दीन पीडीपी नेता अब्दुल नासिर मदनी से केरल में मिला और उसके माध्यम से राजू नाम के दूसरे शख्स से. मदनी को केरल पुलिस ने 31 मार्च को गिरफ्तार किया.’’{mospagebreak}आडवाणी ने कहा है, ‘‘2001 के विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक सत्ता में लौटी. इस मामले का फैसला अगस्त, 2007 में आया. न्यायालय ने प्रतिबंधित अल-उम्मा के नेता सय्यद अहमद बाशा और उसके 71 सहयोगियों को दंडित किया, हालांकि इस मामले में मुख्य अभियुक्त मदनी को अपर्याप्त साक्ष्यों के चलते बरी कर दिया गया.’’ आडवाणी के मुताबिक अब देश उत्सुकता से देख रहा है कि कर्नाटक के मुकदमे में क्या होता है.