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EXCLUSIVE: जंग बोले- दिल्ली में कोई बॉस नहीं, काम तो भाईचारे से ही होता है

केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों की लड़ाई पर गुरुवार को आए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर आजतक ने दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग से खास बातचीत की.

नजीब जंग नजीब जंग

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच चल रही जंग पर पूर्ण विराम लगाते हुए अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने दिल्ली सरकार को झटका देते हुए कहा कि दिल्ली में पुलिस, कानून-व्यवस्था और जमीन से जुड़े मसलों पर आखिरी फैसला केंद्र का ही करेगा. कोर्ट फैसले को लेकर 'आज तक' ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग से खास बातचीत की.

सवाल- जंग साहब जो हाई कोर्ट का फैसला आया है, उससे साफ है कि वह जमीन का मामला हो, कानून व्यवस्था का मामला हो या पुलिस का मामला हो. क्या कहीं न कहीं आप बॉस हैं दिल्ली के?
नजीब जंग- देखिए शब्द 'बॉस' तो अनुचित है. हिंदुस्तान में कोई बॉस नहीं है. हमारे पास कोई राजा महाराज नहीं है. लेकिन जो हमारा सूत्र हैं, जिससे हमारी बुनियाद बनी है, वह है संविधान. अगर विजय हुई है तो वह संविधान की विजय हुई है. ये कहना गलत है कि केजरीवाल साहब की हार हुई है और नजीब जंग की जीत हुई है. हमारा कोई अस्तित्व नहीं है. कोर्ट ने यह साफ किया है कि संविधान इस तरह से पढ़ा जाएगा.

सवाल- केजरीवाल पहले भी सवाल उठा रहे थे कि उपराज्यपाल काम नहीं करने देते. केंद्र सरकार के इशारे पर काम करते हैं. पहले से ही साफ है कि कौन से अधिकार आपके हैं और कौन से उनके हैं?
नजीब जंग- मैं कहता हूं कि हम सौ प्रश्न ले तो 99 के उत्तर तो मिल ही जाते हैं. मैं कहता हूं कि एक दो पर्सेंट केस ऐसे हैं जिसमें संविधान का उल्लंघन हो. वह उनकी समझ है. हमारी तो कोशिश यही होती है कि हम फाइल वापिस भेजते हैं कि संविधान यह कहता है कि सब देख लीजिए. वह न करें तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं.

सवाल- यह कहा जाता है कि आप उनको काम नहीं करने देते. 18 बिल पेंडिंग हैं. वह सैलरी का हो या लोकपाल का हो, आप पास नहीं करते?
नजीब जंग- देखिए मेरे पास बिल पास करने का अधिकार नहीं है. केजरीवाल साहब को बिल पहले केंद्र सरकार की स्वीकृति लेने के लिए भेजने चाहिए. जो बिल केंद्र को नहीं दिए गए, उन्हें दोबारा उनकी स्वीकृति के लिए गए. मंत्रालय में बिलों का परीक्षण चल रहा है. जब वहां काम पूरा हो जाएगा तो वो तो वापस आ जाएंगे.

सवाल- आपको लगता है कि हाई कोर्ट के निर्णय के बाद केजरीवाल शांत हो जाएंगे और उन्हें पता लग जाएगा कि सही क्या है?
नजीब जंग- इसका जवाब उन्हीं से लीजिए. मैं नहीं दे सकता.

सवाल- आपके ऊपर आरोप लगते हैं कि आप केंद्र के इशारों पर काम करते हैं. एक शब्द भी इस्तेमाल किया गया कि आप एजेंट के रूप में काम कर रहे है?
नजीब जंग- मैं नहीं मानता कि पब्लिक में इस किस्म की भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए. दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं. उनकी भाषा ऐसी होनी चाहिए कि वह दिल्ली के मुख्यमंत्री लगें. जहां तक एजेंट की बात है, वह सही है कि उपराज्यपाल होते राष्ट्रपति के प्रतिनिधि होते हैं. मैं केंद्र सरकार का मुलाजिम हूं, दिल्ली सरकार का नहीं.

सवाल- केजरीवाल ने कहा कि हमारे विधायकों को गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्हें जानबूझकर कर फंसाया जा रहा है. केजरीवाल ने यहां तक आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी उनको मरवा भी सकते हैं. ऐसे हालात क्यों बने और उन्हें ऐसा क्यों लगा?
नजीब जंग- देखिए यह तो बेकार की बात है कि कौन मरवा देगा, कौन नहीं मरवा देगा. मैं फिर कहूंगा कि उनकी भाषा अच्छी नहीं है और हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री के लिए मुनासिब नहीं है. मोदी जी की विशाल शख्सियत है. हिंदुस्तान के प्राइम मिनिस्टर है. मैं नहीं समझता कि उनके पास इन सब फिजूल चीजों के लिए कोई वक्त है. जहां तक भाषा की बात है, मेरी तो हमेशा एडवाइस यही रहेगी कि काम दोस्ती और भाई चारे से होता है.

सवाल- जंग साहब जो एक के बाद एक विधायकों को गिरफ्तार किया जा रहा है ऐसे आरोप लगाने की जानबूझकर उनको गिरफ्तार किया जा रहा है एक के बाद एक?
नजीब जंग- ये सवाल पुलिस कमिश्नर से पूछिए. मैं समझता हूं कि जब भी गिरफ्तारी होगी, तो वो किसी वजह से होती होगी. पुलिस कानून से खेल नहीं सकती. अगर कोई बात नहीं होती तो जेल क्यों जाते हैं. अगर कोई कारण ने हो तो मुकदमा ही न चले.

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