महानगर के एक होटल में 23 जून को होने वाला ‘कोलकाता बीफ फेस्ट’ अब नहीं होगा. सोशल मीडिया पर फेस्टिवल के आयोजन के खिलाफ मुहिम छिड़ने और विरोध में असंख्य कॉल आने के बाद आयोजकों ने इसे रद्द करने का फैसला किया.
सोशल मीडिया पर कई दक्षिण-पंथी पेजों के अलावा व्यक्तिगत तौर पर भी कई यूजर्स ने फेस्टिवल के आयोजकों पर इस तरह के फेस्टिवल से हिंदुओं का अपमान करने का आरोप लगाया.
फेसबुक पर ‘हिंदुस्तान राइट विंग्स’नाम के पेज पर लिखा गया- ‘ये सिर्फ भारत में ही हो सकता है जहां हिंदू बहुल देश में खुले में बीफ पार्टी आयोजित की जा सकती है.’
एक और पोस्ट में आयोजक का मोबाइल नंबर शेयर करने के साथ लिखा गया है- ‘हिंदू भाइयों, नोट कीजिए कोलकाता में हमारी गोमाता की हत्या के लिए आयोजन किया जा रहा है. हम सभी गोरक्षकों से अपील करते हैं कि वे गाय को बचाने के लिए इस आयोजन में एकत्र हों.’
एक और फेसबुक यूजर ने लिखा, ‘लगता है ये बेशर्म आयोजक अपना विवेक खो चुके हैं. वो थोड़े मुनाफे के लिए कुछ भी कर सकते हैं. ऐसे वक्त में जब सारा देश गाय को बचाना चाहता है, तुम ऐसा आयोजन कर रहे हो. लानत है तुम पर.’
सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद आयोजकों ने बुधवार को पहले फेस्टिवल का नाम ‘कोलकाता बीप फेस्ट’ किया और आखिरकार इसे रद्द कर दिया.
इवेंट के एक आयोजक ने फेसबुक पर लिखा- ‘कुछ साफ कारणों से हमारे पास नाम बदलने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था. इवेंट का मकसद अद्भुत खाने के लिए पूरा दिन रखना था जिससे हर कोई अच्छा समय बिता सके. एक बार फिर हम इस और ध्यान दिलाना चाहते हैं कि यद्यपि फोकस बीफ व्यंजनों पर था, लेकिन वहां कुछ अद्भुत पोर्क डिशेज भी होतीं. मेनू वही रहेगा और इस पर हम आपको जल्दी अपडेट करेंगे.’
आयोजकों में शामिल अर्जुन कार ने इंडिया टुडे को बताया- ‘ये साधारण फूड फेस्टिवल था जिसमें संगीत और कलाकारों की प्रस्तुतियां भी होतीं. इसक मकसद किसी की भावनाओं को आहत करना कतई नहीं था.’
आखिरकार एक आयोजक ने इवेंट के पूरी तरह रद्द किए जाने की जानकारी दी. इस आयोजक ने कहा, ‘हमें सैकड़ों कॉल आ रहे थे, पूरी रात कॉल आते रहे. हम नहीं चाहते कि जो इवेंट में आएं वे खुद को असुरक्षित महसूस करें. ऐसे में हमने फेस्टिवल को रद्द करने का फैसला किया.’