मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भोपाल मध्य से बीजेपी प्रत्याशी सुरेंद्रनाथ सिंह की हार पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने विवादित बयान दिया है. अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले विजयवर्गीय ने कहा कि सुरेंद्रनाथ सिंह की हार से ज्यादा उन्हें इस बात का सबसे ज्यादा दुख है कि राष्ट्रवादी ताकतों के आगे बीफ खाने वाले जीत गए.
भोपाल में बीजेपी बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में विजयवर्गीय ने कहा कि चुनाव तो बहुत सारे नेता हारे हैं, लेकिन मुझे सुरेंद्रनाथ सिंह की हार का सबसे ज्यादा दुख है. दरअसल विजयवर्गीय के निशाने पर कांग्रेस के जीते हुए मुस्लिम विधायक आरिफ मसूद थे.
बता दें कि भोपाल मध्य विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सुरेंद्र नाथ सिंह और कांग्रेस के आरिफ मसूद के बीच सीधा मुकाबला था. इस सीट पर बाजी पलटते हुए कांग्रेस के आरिफ मसूद ने जीत दर्ज की. उन्हें 76647 वोट मिले थे, जबकि सुरेंद्रनाथ सिंह को 61,890 वोट मिले.
इससे पहले 2013 के चुनाव में सुरेंद्र नाथ सिंह ने जीत हासिल की थी. उन्होंने आरिफ मसूद को हराया था. 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश में 15 साल का सूखा खत्म करते हुए जीत दर्ज की. 230 सदस्यों की विधानसभा में कांग्रेस की 114 सीटों के मुकाबले बीजेपी ने 109 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इस जीत के साथ कांग्रेस ने राज्य की कमान अपने दिग्गज नेता कमलनाथ के हाथों में दे दी.
मसूद का पलटवार
कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. आरिफ मसूद ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में करीब 60 फीसदी वोटर हिंदू हैं, ऐसे में कैलाश विजयवर्गीय का बयान उन सबका अपमान है.
मसूद ने कैलाश विजयवर्गीय पर पलटवार करते हुए पूछा कि उन्हें ये बताना चाहिए कि उन्होंने कब और किस तारीख पर लंच या डिनर में बीफ खाते हुए देखा. इस दौरान मसूद ने कहा कि उन्होंने कभी बीफ नहीं खाया.
प्रियंका को लेकर भी विजयवर्गीय ने दिया था विवादित बयान
ये कोई पहला मौका नहीं है कि विजयवर्गीय ने कोई विवादित बयान दिया हो. इससे पहले हाल ही में वो कांग्रेस की नवनिर्वाचित प्रियंका गांधी को लेकर भी विवादित बयान दिया था. विजयवर्गीय ने कहा कि कभी कोई कांग्रेस नेता मांग करता है कि करीना कपूर को भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़वाया जाए, तो कभी इंदौर से चुनावी उम्मीदवारी को लेकर सलमान खान के नाम पर चर्चा की जाती है.
इसी तरह, प्रियंका को कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में ले आया जाता है. उन्होंने कहा कि अगले लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारने के लिए कांग्रेस के पास मजबूत नेता नहीं हैं. इसलिए वह ऐसे चॉकलेटी चेहरों के माध्यम से चुनाव लड़ना चाहती है. अगर कांग्रेस में राहुल के नेतृत्व के प्रति आत्मविश्वास होता, तो प्रियंका को सक्रिय राजनीति में नहीं लाया जाता.