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कर्नाटक के CM सिद्धारमैया हाथ में नींबू लेकर घूमते देखे गए

कुछ जगह ऐसी धारणा है कि बुरी बलाओं को भगाने के लिए पूजा के बाद नींबू दिया जाता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या सिद्धारमैया भी अंधविश्वासों को मानने लगे हैं.

सिद्धारमैया सिद्धारमैया

वक्त इनसान को कैसे बदल देता है, इसकी मिसाल हैं कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया. कभी अंधविश्वासों का जोरदार विरोध करने की बात कहने वाले सिद्धारमैया हाल में मैसूर के दौरे पर गए तो हर जगह सीधे हाथ में नींबू लेकर घूमते देखे गए. मैसूर में सिद्धारमैया मीडिया के सामने आए भी तो उन्होंने नींबू को लेकर किसी सवाल का जवाब नहीं दिया.

कुछ जगह ऐसी धारणा है कि बुरी बलाओं को भगाने के लिए पूजा के बाद नींबू दिया जाता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या सिद्धारमैया भी अंधविश्वासों को मानने लगे हैं. माना जाता है कि जून में सिद्धारमैया ने अपनी कार के बोनेट पर काले कौए को बैठा देखने के बाद कार बदल कर नई ले ली. ऐसा अंधविश्वास है कि काला कौआ अनिष्ट का प्रतीक होता है.

बता दें कि सिद्धारमैया पूर्व में खुद को अंधविश्वास-ढकोसलों का घोर विरोधी बताते रहे हैं. सिद्धारमैया ने 2013 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री की शपथ सत्य के नाम पर ली थी, ईश्वर के नाम पर नहीं. सिद्धारमैया कर्नाटक विधानसभा में अंधविश्वास विरोधी बिल पास कराने पर जोर देते रहे हैं. हालांकि विपक्ष इसके खिलाफ था. अब इसी विपक्ष को सिद्धारमैया को नींबू हाथ में लेकर घूमता देख हल्ला बोलने का मौका मिल गया है. विपक्ष का कहना है कि इससे साबित होता है कि सिद्धारमैया के दोहरे मानदंड हैं.

सूत्रों का कहना है कि शायद इस साल जुलाई में सिद्धारमैया को उनके बेटे राकेश सिद्धारमैया की आकस्मिक मौत ने तोड़ दिया. 39 साल का राकेश यूरोप के दौरे पर थे कि उन्हें बेल्जियम में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. पेन्क्रियाज संबंधी बीमारी की वजह से उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके. बहरहाल, कारण कोई भी हो सिद्धारमैया का नींबू हाथ में लेकर घूमना सभी को हैरान कर देने वाला था. ये नहीं पता चल सका कि नींबू किसने और क्यों सिद्धारमैया को दिया?

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