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'जहर की खेती' करने वाले मोदी के लिए विकास सिर्फ चुनावी मुखौटाः जयराम रमेश

लोकसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राहुल गांधी की जमकर तारीफ की और बीजेपी व नरेंद्र मोदी पर जहर की खेती का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भले ही मोदी का कैंपेन आक्रामक हो पर कांग्रेस डरने वाली नहीं है. वे भी जनता के बीच जाएंगे और बीजेपी का असली चेहरा दिखाएंगे.

कांग्रेस नेता जयराम रमेश कांग्रेस नेता जयराम रमेश

लोकसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राहुल गांधी की जमकर तारीफ की और बीजेपी व नरेंद्र मोदी पर जहर की खेती का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भले ही मोदी का कैंपेन आक्रामक हो पर कांग्रेस डरने वाली नहीं है. वे भी जनता के बीच जाएंगे और बीजेपी का असली चेहरा दिखाएंगे.

इसके अलावा, जयराम रमेश लोकसभा टिकट बंटवारे पर उन्होंने अपनी पार्टी को नसीहत दी कि आपराधिक छवि वाले नेताओं को टिकट न मिले. जयराम रमेश से बात की हमारे संवाददाता अशोक सिंघल ने.

राहुल गांधी की रणनीति को लेकर कांग्रेस में सवाल उठ रहे हैं?
नहीं, ये गलत खबर है. राहुल गांधी हमारी पार्टी के उपाध्यक्ष हैं. हमारी चुनावी रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है कि वो सही काम नहीं कर रहे हैं. वो चाहते हैं कि परिवर्तन हो. वो चाहते हैं कि युवा नेता आगे आएं. वो उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया में बदलाव लाना चाहते हैं ताकि जमीन से जुड़े लोगों को टिकट मिल सके. कभी तो शुरुआत होगी इस प्रक्रिया की. ये प्रयोग उन्होंने NSUI में किए हैं. उसे कांग्रेस में लाने की कोशिश कर रहे हैं. ये बात सही है कि राहुल गांधी भविष्य की भी सोच रहे हैं पर वे यह भी जानते हैं कि हमारी पहली लड़ाई 2014 की है. उसे नजरअंदाज नहीं कर रहे. इसलिए पूरे देश का दौरा कर रहे हैं.

राहुल गांधी में आत्मविश्वास की कमी है?
राहुल गांधी जी बोलते कम हैं. उनका काम करने का तरीका अलग है. वो दावा नहीं करते. वो मैं...मैं...मैं...नहीं करते. वो चाहते हैं कि एक अच्छी टीम बने. वो चाहते हैं कि हमलोग सब एक होकर चुनाव लड़े. सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर ना हों. ऐसा चुनाव प्रचार करें कि लोगों को पूरी कांग्रेस पार्टी पर विश्वास हो. एक तरफ मोदीजी कह रहे हैं मुझे वोट दीजिए जबकि राहुल गांधी पूरी कांग्रेस पार्टी को वोट के लिए मांग रहे है. ताकि आपके सामने एक टीम खड़ी हो. बॉडी लैंग्वेज का क्या है. सबको लोग नरेंद्र मोदी के माफिक चौड़े तो नहीं है. हम लोग शालीनता से काम करेंगे. हम सत्ता में रहे हैं. 10 साल तक हमारी सरकार चली है. हमें पता है कि चुनाव में हमें क्या करना है और क्या नहीं. बोलने का एक तरीका होता है. गाली की राजनीति नहीं होनी चाहिए.

... तो जहर की खेती और खून की राजनीति का बयान क्या है?
उन्होंने जहर तो फैलाया है. बीजेपी और आरएसएस की राजनीति यही तो है. खास तौर से बिहार और उत्तर प्रदेश में ध्रुवीकरण की राजनीति हो ही रही है. मोदी को 2002 दंगों में कोई क्लीनचिट नहीं मिली है. ये गलत प्रचार है. सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा है कि मोदी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सबूत नहीं है. पर ये भी कहा है कि गलत काम हुआ, आपराधिक मानसिकता से फैसले लिए गए. पर सबूत काफी नहीं हैं.

पर बीजेपी तो विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ रही है?
हम तो चाहते हैं कि बीजेपी का असली चेहरा दिखे. विकास और गर्वनेंस मुखौटा है. असली एजेंडा है सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का. मैं पिछले 6 महीने से कह रहा हूं कि कांग्रेस और आरएसएस के बीच चुनाव होगा. बीजेपी की चाबी आरएसएस के पास है. विकास तो मुखौटा है. असली चेहरा जनता के सामने आना चाहिए. इनका असली चेहरा मुजफ्फरनगर दंगे में दिखा.

...तो जनता ने आपको गुजरात में खारिज क्यों किया?
ये सच है कि हमारी पार्टी मोदी से चुनाव हारी है. तीन बार वो मुख्यमंत्री बने हैं. पर उन्होंने किस तरह की राजनीति की है गुजरात में. समाज में जो विभाजन लाया है. धर्म के आधार पर लोगों को बांटा है. उनकी सामाजिक विचारधारा क्या है? हम इसपर सवाल उठा रहे हैं. फिर भी हम विकास की बात करते हैं. कभी-कभी चुनाव प्रचार में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल होता है. हम ही नहीं, विपक्ष भी ऐसे बयान देता है. जहां तक सोनिया गांधी 'जहर की खेती' वाला बयान है. इसमें कुछ गलत नहीं. ये सच ही तो है, बीजेपी की राजनीति ध्रुवीकरण की है. जिसका ऑक्सीजन है जहर.

क्या मोदी से डर गई है कांग्रेस?
सच तो यह है कि आज बीजेपी मोदी बन गई है. बीजेपी जीरो है, सिर्फ मोदी दिखाई देते हैं. वो कहते हैं कि मुझे वोट दीजिए. जबकि हम कांग्रेस पार्टी के लिए वोट मांग रहे हैं. हमारी रणनीति मोदी पर केंद्रित है क्योंकि हमारे सामने बीजेपी नहीं मोदी हैं. ऐसा लगता है कि बीजेपी का चुनाव चिन्ह भी बदल गया है. कमल के फूल की जगह मोदी का फूल नजर आता है. हमने कई चुनाव लड़े हैं. कई जीते और कई हारे. हम इससे भागने वाले नहीं. मोदी जी कितने भी आक्रामक हों. उनकी भाषा कितनी भी तीखी हो. हमारे पास बड़ी चुनौतियां है. कठिन समय है. हर राज्य में अगल-अलग परिस्थियों का सामना करना पड़ रहा है. सच तो ये है कि पूरे देश में हमारा संगठन है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोदी का कैंपेन आक्रामक है. मीडिया और सोशल मीडिया में भी उनका प्रचार हो रहा है. वो कलाकार आदमी हैं. जिस जगह जाते हैं वहां की वेशभूषा में नजर आते हैं. मीडिया में भी उनको अच्छा कवरेज मिलता है पर इससे ये साबित नहीं होता है कि हम डरे हुए. हम भी चुनाव प्रचार कर रहे हैं. राहुल गांधी जगह-जगह जा रहे हैं. एक संदेश लिए जा रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी को जनादेश दीजिए. क्योंकि कांग्रेस की विचारधारा से देश आगे बढ़कर पाएगा.

केजरीवाल की राजनीति को कॉपी करते हैं राहुल गांधी?
राहुल गांधी परिवर्तन की पॉलिटिक्स करते हैं. परिक्रमा की नहीं. लोगों के बीच जाओ. वो सामाजिक कार्यकर्ता की तरह नहीं करते. वो केजरीवाल के आने से पहले से ही ऐसी राजनीति कर रहे हैं. पिछले 10 साल से राहुल गांधी ने ये सबकुछ किया. उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण पर काम किया.

क्या भ्रष्टाचार के कारण कांग्रेस की छवि खराब हुई?
टिकट की घोषणा होने दीजिए. जब राहुल गांधी कहते हैं कि हम करप्शन के खिलाफ हैं तो हमारा एजेंडा साफ है. लोकपाल बिल लेकर आए. कांग्रेस शासित राज्यों में मजबूत लोकायुक्त भी आ जाएगा. एक बार टिकट की घोषणा होने तो दीजिए. हम आम आदमी की जिंदगी से भी करप्शन को मिटाना चाहते हैं.

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