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इसरो के PSLV-C 44 मिशन की उल्टी गिनती शुरू, लॉन्चिंग आज

PSLV C 44 launching भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) गुरुवार को पीएसएलवी-सी44 की लॉन्‍चिंग की पूरी तैयार कर चुका है. यह इमेजिंग उपग्रह Microsat R और दुनिया के सबसे हल्के उपग्रह को लेकर उड़ान भरेगा.

लॉन्‍च के लिए तैयार  PSLV-C44(फोटो-@isro) लॉन्‍च के लिए तैयार PSLV-C44(फोटो-@isro)

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा लॉन्‍चिंग सेंटर से गुरुवार को होने वाले पीएसएलवी-सी44 की लॉन्‍चिंग के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है. भारतीय ध्रुवीय रॉकेट पीएसएलवी-सी 44 छात्रों द्वारा विकसित कलामसैट और पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम माइक्रासैट-आरको लेकर उड़ान भरेगा.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तरफ से जारी मिशन अपडेट के मुताबिक, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्‍पेस स्‍टेशन  पीएसएलवी-सी44 की लॉन्‍चिंग की जानी है. यह इसरो के पीएसएलवी व्‍हीकल की 46वीं उड़ान है. कलमासैट पेलोड और माइक्रोसेट-आर उपग्रह को पोलर सैटेलाइट लॉन्‍चिंग व्‍हीकल अंतरिक्ष में ले जाएगा. 

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर SHAR के फर्स्ट लॉन्च पैड (FLP) से Kalamsat पेलोड और माइक्रोसेट-आर की लॉन्चिंग की जाएगी. यह लॉन्‍च अपने आप में यूनिक है क्योंकि रॉकेट का चौथा चरण फिर से इस्तेमाल किया जा सकेगा.

कलाम सैट का नाम पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है. यह एक फेमटो सैटेलाइट है और दावा किया जाता है कि इसे देश के एक हाईस्कूल के छात्रों की टीम द्वारा निर्मित किया गया है. यह दुनिया का सबसे हल्का उपग्रह है.

PSLV-C44 एक चार-चरणीय लॉन्च व्‍हीकल है. इसमें दो स्ट्रैप-ऑन कॉन्फिगरेशन के साथ ठोस और तरल स्‍टेजों को ऑप्‍शन दिया गया है. इसे इस खास मिशन के लिए PSLV-DL का नाम दिया गया है.

इसरो के मुताबिक, 2 स्ट्रैप-ऑन कॉन्फ़िगरेशन वाला PSLV इस मिशन के लिए तय किया गया और कॉन्फ़िगरेशन PSLV-DL के तौर पर तैयार किय गया. PSLV-C44 PSLV-DL का पहला मिशन है और PSLV का एक ही नया प्रकार है.

दूसरी तरफ, लॉन्च व्‍हीकल दरअसल पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल का नया प्रकार है. इसे एक ऑर्बटिल प्‍लेटफॉर्म स्थापित करने और कुछ प्रयोगों पर काम करने के लिए एक हाई सर्कुलर ऑर्ब‍िट में ले जाया जाएगा.

DRDO का माइक्रोसेट आर, PSLV-C44 या PSLV-DL के पेलोड का भी हिस्सा होगा. वहीं, Microsat R एक इमेजिंग उपग्रह है, जिसका उपयोग भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन(DRDO) द्वारा अपने ऑपरेशन में किया जाएगा.

बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने हाल ही में साल 2019 में 32 मिशन लॉन्च करने का ऐलान किया था. जिसमें 14 रॉकेट, 17 सैटेलाइट और एक टेक डेमो मिशन शामिल हैं

वहीं भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने साल 2018 में 17 लॉन्च व्‍हीकल मिशन और 9 अंतरिक्ष यान मिशन लॉन्च किए. ISRO ने अब तक एजेंसी द्वारा निर्मित सबसे भारी उपग्रह भी लॉन्च किया जो GSAT-11 था.

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