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सालाना 2 लाख करोड़ के सब्जी-फल होते हैं बर्बाद

एक बार फिर यह तथ्‍य सामने आया है कि देश में कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की घोर कमी है, जिसके चलते करोड़ों की सब्जियां और फल बर्बाद हो रहे हैं. उद्योग मंडल एसोचैम के एक स्टडी में यह कहा गया है कि हर साल 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्जी और फल बर्बाद हो जाते हैं.

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एक बार फिर यह तथ्‍य सामने आया है कि देश में कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की घोर कमी है, जिसके चलते करोड़ों की सब्जियां और फल बर्बाद हो रहे हैं. उद्योग मंडल एसोचैम के एक स्टडी में यह कहा गया है कि हर साल 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्जी और फल बर्बाद हो जाते हैं.

अध्ययन के अनुसार फल व सब्जी जल्दी खराब होने वाली खाने की चीजें हैं. कटाई के बाद बेहतर रख-रखाव के अभाव में फसल के खराब होने से करीब 30 प्रतिशत उत्पादित फल व सब्जी खपत के लिहाज से उपयुक्त नहीं होते.

अध्ययन के अनुसार, जिन राज्यों में फसलों की कटाई के बाद सर्वाधिक नुकसान होता है, उनमें पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर है. वहां हर साल 13,600 करोड़ रुपये के फल व सब्जियों का नुकसान होता है. उसके बाद क्रमश: गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र का स्थान है. गुजरात में जहां करीब 11,400 करोड़ रुपये का सालाना नुकसान होता है, वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र में क्रमश: 10,700 करोड़ रुपये, 10,300 करोड़ रुपये तथा महाराष्ट्र में 10,100 करोड़ रुपये सालाना फल एवं सब्जी का नुकसान होता है.

एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, ‘उपयुक्त भंडारण सुविधा के अभाव के कारण देश में उत्पादित फल-सब्जियों की काफी मात्रा में बर्बादी होती है, जिसे काफी हद तक रोका जा सकता है.’ उन्होंने कहा कि बेहतर ढुलाई, भंडारण, कटाई से पहले और बाद के उपायों के जरिये फल-सब्जी की बर्बादी रोकी जा सकती है.

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इसके अलावा अध्ययन में कहा गया है कि कटाई के बाद के नुकसान को कम करने तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए भंडारण तथा रखरखाव को बेहतर बनाने की जरूरत है. अध्ययन के अनुसार, करीब 370 लाख टन अतिरिक्त फल-सब्जी रखने की क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज की जरूरत है. देश में फिलहाल भंडारण क्षमता 300 लाख टन से अधिक है.

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