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अब समंदर भी होगा महफूज, देश का पहला सैन्य सैटेलाइट GSAT-7 लॉन्च

भारत की समुद्री सीमाएं अब पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित होंगी. भारत ने पहली बार ऐसा सैटेलाइट लॉन्च किया है जो पूरी तरह सेना को समर्पित है. 'जीएसएटी-7' को दक्षिण अमेरिका के कौरू से देर रात दो बजे लॉन्च किया गया.

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इसरो के सेंटर में GSAT-7
इसरो के सेंटर में GSAT-7

भारत की समुद्री सीमाएं अब पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित होंगी. भारत ने पहली बार ऐसा सैटेलाइट लॉन्च किया है जो पूरी तरह सेना को समर्पित है. 'जीएसएटी-7' को दक्षिण अमेरिका के कौरू से देर रात दो बजे लॉन्च किया गया.

यह सैटेलाइट अपने ही देश में बना है, लेकिन इसरो ने इसे लॉन्च करने के लिए अपने भारी रॉकेट के बजाए एक यूरोपीय रॉकेट किराए पर लिया.

हिंद महासागर पर रहेगी नजर
जीएसटी-7 की मदद से नौसेना एक 'टॉप सीक्रेट एनक्रिप्टेड सिस्टम' के जरिये हिंद महासागर में दुश्मन जहाजों और पनडुब्बियों की सही लोकेशन का पता कर सकेगी और जानकारी का लेन-देन कर सकेगी. इस सैटलाइट को लॉन्च करने में 185 करोड़ रुपए का खर्च आया है.

किराया पड़ा महंगा
जीएसएलवी के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद इसरो जोखिम नहीं लेना चाहता था. हाल ही में इसमें ईंधन रिसने की वजह से उसे काफी नुकसान उठाना पड़ा था. किराए का रॉकेट और इंश्योरेंस का खर्च मिला दें, तो इस पूरे मिशन में 655 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.

चुनिंदा देशों के पास है ऐसा सैटेलाइट
इस सैटेलाइट का वजन 2.5 टन है, यानी 5 वयस्क हाथियों के बराबर. इससे लॉन्च करने के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस जैसे देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जिनके पास 'मिलिट्री कम्युनिकेशन सैटलाइट' हैं.

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