काबुल में पिछले दिनों हुए आत्मघाती हमले को पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तय्यबा की ओर से अंजाम दिए जाने के संकेतों के बीच अमेरिकी दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने कहा कि हमले का निशाना भारतीय नहीं थे.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने कहा ‘इस हमले के संबंध में मैं इस बात को स्वीकार नहीं करता कि यह भारतीय प्रतिष्ठानों जैसे भारतीय दूतावास, पर हमले जैसा था. वह आसानी से लक्ष्य बनाया जाने वाला निशाना था. किसी भी परिणाम पर मत पहुंचिए.’
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा था कि हमलों का निशाना भारतीय थे. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि किसी भी परिणाम पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी. हॉलब्रुक ने कहा ‘मैं समझता हूं कि क्यों पाकिस्तान और भारत में हर कोई एक-दूसरे की ओर ध्यान केंद्रित किए रहता है. लेकिन कृपया, ऐसा कोई परिणाम मत निकालिए, जिसका कोई सबूत नहीं है.’
हालांकि अफगानिस्तान की खुफिया सेवा के प्रवक्ता ने बताया कि उनकी एजेंसी के पास इस बात के सबूत हैं कि 26 फरवरी को हुए इस हमले में पाकिस्तान, खास तौर पर लश्कर-ए-तय्यबा शामिल था. अमेरिकी दूत ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों के हित अफगानिस्तान से जुड़े हैं. अंसारी ने कहा कि होटल में भारतीय कहां थे, इस तरह की जानकारी पता करना अफगान तालिबान के लिए बहुत मुश्किल है.
काबुल में हुए इस हमले में छह भारतीय, एक इतालवी एक फ्रांसीसी फिल्म निर्माता, तीन अफगान पुलिसकर्मी और चार नागरिक मारे गये थे. इसके अलावा एक अत्यंत क्षत विक्षत शव मिला था जिसकी पहचान नहीं हो सकी थी. ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने हालांकि कहा कि काबुल में मौजूद अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि यह हमला पाकिस्तान के अफगान आतंकी गुट हक्कानी नेटवर्क द्वारा किया गया है.
लेकिन अखबार के अनुसार, भारतीय अधिकारियों को आशंका है कि दो आतंकी समूहों ने एक साथ मिलकर इस हमले को अंजाम दिया. पोस्ट ने कहा कि इस हमले में लश्कर ए तय्यबा के शामिल होने के गहरे अर्थ हैं क्योंकि 14 महीने बाद पिछले सप्ताह भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव स्तर की बातचीत हुई थी. भारत और अफगानिस्तान ने पहले भी 2008 में काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर बम धमाके लिए पाकिस्तान और उसकी सहायता से चलाए जा रहे हकानी नेटवर्क को घेरा था.
भारतीय दूतावास पर हुए धमाके में 58 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. पाकिस्तान के सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मोहम्मद साद ने भी लश्कर और अफगान आतंकी गुटों की मिली भगत की पुष्टि की है. उन्होंने पोस्ट से कहा, ‘लश्कर तालिबान के साथ है.’ पाकिस्तानी सेनाधिकारी ने कहा कि लश्कर के आतंकी उत्तरी वजीरिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं.
‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने कहा कि संकेतों से साफ है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकी संगठनों के बीच स्पष्ट संबंध है और यह 24 फरवरी को सुन्नी आतंकी संगठन लश्कर ए जाहवी प्रमुख कारी जफर पर हुए हमले से साबित होता है. जफर का संगठन पाकिस्तान में बना था लेकिन उसकी हत्या हक्कानी नेटवर्क और तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान के गढ़ उत्तरी वजीरिस्तान में कर दी गयी थी. सिराज हक्कानी द्वारा संचालित हक्कानी नेटवर्क अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है और काबुल में हुए कई हमलों में इसका हाथ रहा है.