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सोनिया ने बताया- किसके कहने पर हिन्दी बोलना शुरू की, कोर्स भी किया

सोनिया ने कहा कि सार्वजनिक रैलियों में बोलना मेरे लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है और वो भी अगर हिन्दी में बोलना हो तो काफी दिक्कत होती है. लेकिन अब मैं अंग्रजी के साथ-साथ हिन्दी भी बोल सकती हूं.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सोनिया गांधी इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सोनिया गांधी

आम तौर पर अंग्रेजी में भाषण देने वाली यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को कई चुनावी सभाओं में हिन्दी में बोलते सुना गया. सोनिया की हिन्दी अच्छी नहीं है और वो भारत आने से पहले फ्रेंच ही जानती थीं. मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सोनिया ने बताया कि उन्होंने हिन्दी कैसे सीखी.

इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन अरुण पुरी ने जब सोनिया से पूछा कि बीते सालों में आप में कई बदलाव देखने को मिले हैं, पहले आप नेता बनीं और हिन्ही भी बोलने लगीं, ये सब कितना मुश्किल था. इस पर सोनिया ने कहा, हां मैं पहले अंग्रजी भी नहीं जानती थी और मुझे इसके लिए कई चुनौतियां का सामना करना पड़ा.

हिन्दी के सीखने लिए किया कोर्स

सोनिया गांधी ने बताया कि उनकी सास (इंदिरा गांधी) उनसे घर पर हिन्दी में बात करने के लिए कहा करती थीं. लेकिन उसके बाद मैंने ग्रीनपार्क के एक छोटे से इस्टीट्यूट में हिन्दी स्पीकिंग का कोर्स किया और फिर अंग्रेजी बोलने की मेरी गलत आदत जाती रही. उन्होंने कहा कि उस कोर्स की वजह से ही मैंने हिन्दी की व्याकरण सीखी और फिर सार्वजनिक तौर पर भी हिन्दी बोलना शुरू कर दिया.

सोनिया ने कहा कि सार्वजनिक रैलियों में बोलना मेरे लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है और वो भी अगर हिन्दी में बोलना हो तो काफी दिक्कत होती है. लेकिन अब मैं अंग्रजी के साथ-साथ हिन्दी भी बोल सकती हूं.

नहीं चाहती थी राजनीति में आएं राजीव

अपने राजनीतिक सफर के बारे में सोनिया ने कहा कि वह नहीं चाहती थीं कि राजीव राजनीति में आएं, लेकिन उन्हें इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजनीति में आना पड़ा. इसी तरह वह खुद भी राजनीति में नहीं आना चाहती थी, लेकिन उन्हें भी मजबूरी में यह फैसला लेना पड़ा.

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, 'मेरे लिए राजनीति में आने का फैसला बड़ा कठिन था. मैंने इस पर फैसला लेने के लिए 6-7 साल का समय लिया. उस समय में कांग्रेस लगातार संकट से घिरी हुई थी. मैंने कुछ अलग करने की कोशिश की, और इस उम्मीद से राजनीति में आई. मुझे भी मजबूरी में राजनीति में आना पड़ा. अगर मैं ऐसा नहीं करती तो लोग मुझे कायर कहते.'

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