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अग्नि-5 परमाणु मिसाइल का अंतिम टेस्ट करने की तैयारी में भारत, जद में आएगा समूचा चीन

भारत परमाणु क्षमता से लैस इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्ट‍िक मिसाइल अग्नि-5 का परीक्षण करने की तैयारी में है. परीक्षण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं जिसे दिसंबर के आखिर या जनवरी के शुरुआत में अंजाम दे दिया जाएगा. इससे पहले अग्नि-5 के तीन परीक्षण हो चुके हैं. आखिरी परीक्षण जनवरी 2015 में हुआ था. उस वक्त कुछ तकनीकी खामियां आई थीं जिन्हें दुरुस्त कर लिया गया है.

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अग्नि-5 मिसाइल
अग्नि-5 मिसाइल

भारत परमाणु क्षमता से लैस इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्ट‍िक मिसाइल अग्नि-5 का परीक्षण करने की तैयारी में है. परीक्षण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं जिसे दिसंबर के आखिर या जनवरी के शुरुआत में अंजाम दे दिया जाएगा. इससे पहले अग्नि-5 के तीन परीक्षण हो चुके हैं. आखिरी परीक्षण जनवरी 2015 में हुआ था. उस वक्त कुछ तकनीकी खामियां आई थीं जिन्हें दुरुस्त कर लिया गया है.


यह अग्नि-5 मिसाइल का आखिरी टेस्ट होगा. यह मिसाइल चीन के सुदूर उत्तर इलाके में मार करने में सक्षम है. इस वजह से इस टेस्ट को रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है. इसकी जद में समूचा चीन, एशिया महाद्वीप और यूरोप तथा अफ्रीका के कुछ हिस्से भी आ जाएंगे.

अग्नि-5 मिसाइल जब सेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा तो भारत इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्ट‍िक मिसाइल रखने वाले सुपरएक्सक्लूसिव क्लब में शामिल हो जाएगा. अभी इस क्लब में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन ही हैं. इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्ट‍िक मिसाइलों की मारक क्षमता 5000-5500 किलोमीटर से ज्यादा होती हैं.

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अग्नि-5 अग्नि सीरीज की मिसाइलें हैं जिन्हें डीआरडीओ ने विकसित किया है. पृथ्वी और धनुष जैसी कम दूरी तक मारे करने में सक्षम मिसाइलों के अलावा भारत के बेड़े में अग्नि-1, अग्नि-2 और अग्नि-3 मिसाइलें हैं. इन्हें पाकिस्तान को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है. अग्नि-4 और अग्नि-5 मिसाइलों को चीन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.

अग्नि-5 मिसाइल की ऊंचाई 17 मीटर और व्यास 2 मीटर है. इसका वजन 50 टन और यह डेढ़ टन तक परमाणु हथियार ढोने में सक्षम है. इसकी स्पीड ध्वनि की गति से 24 गुना ज्यादा है.

डीआरडीओ इस मिसाइल की सही मारक क्षमता पर बहुत कुछ नहीं बोलता लेकिन इतना जरूरत बताता है कि यह 5500 से 5800 किलोमीटर तक मार कर सकती है. लेकिन चीन कहता है कि अग्नि-5 की क्षमता करीब 8000 किलोमीटर तक मार करने की है.

अग्नि-5 मिसाइल का कनस्तर-लॉन्च वर्जन इसे और भी खतरनाक बनाता है. इस वर्जन के बूते इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है और जहां से मर्जी करे 50 टन के इस मिसाइल को छोड़ा जा सकता है.


भारत के पास परमाणु क्षमता से लैस मिसाइलों की तादाद 110 से 120 के करीब है. इनमें पृथ्वी-2 (350 किमी), अग्नि-1 (700 किमी), अग्नि-2 (2000 किमी), अग्नि-3 (3000 किमी) भारतीय बेड़े में पहले से शामिल हैं. अगले दो वर्षों में अग्नि-4 और अग्नि-5 भी भारतीय बेड़े में शामिल हो जाएंगी. भारत के पास परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत भी है.

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पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता से लैस मिसाइलों की तादाद 130 से 140 के करीब है. पाकिस्तान के पास चीन और उत्तरी कोरिया की मदद से विकसीत शाहीन और गौरी सीरीज की मिसाइलें हैं. शाहीन-2 की मारक क्षमता 2500 किलोमीटर जबकि गौरी-2 की क्षमता 1800 किलोमीटर है. पाकिस्तान के पास अभी तक कोई इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्ट‍िक मिसाइल नहीं है. 60 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली नासिर मिसाइल को भारत की परमाणु क्षमता को टक्कर देने वाला हथियार बताया जाता है.

चीन के पास परमाणु हथियारों का बड़ा जखीरा है. इसके बेड़े में 250 से ज्यादा मिसाइलें हैं. चीन के पास डीएफ-डीएफ-31ए मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 11,200 किलोमीटर बताई जाती है. इनकी जद में भारत के सभी शहर बताए जाते हैं. ड्रैगन के पास परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी भी है और इन मिसाइलों की मारक क्षमता 7400 किलोमीटर है.


पाकिस्तान ने आशंका जताई है कि भारत दिन-प्रतिदिन अपने परमाणु जखीरे में बढ़ोतरी कर रहा है. पाकिस्तान के सरकारी रेडियो चैनल 'रेडियो पाकिस्तान' के मुताबिक भारत परमाणु पनडुब्बी विकसित कर रहा है.

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव तसनीम असलम ने कहा कि भारतीय नेतृत्व के 'गैरजिम्मेदाराना बयानों' से क्षेत्रीय शांति को खतरा पैदा हो सकता है. पाकिस्तान को भी यह लगता है कि भारत एनएसजी की सदस्यता हासिल करने में कामयाब रहेगा.

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