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iChowk: वारिस तो बेटा ही होगा, लेकिन क्या भैंस चराएगा

बिहार चुनाव में लालू प्रसाद रिंग मास्टर बने हुए हैं. फिर भी उन्हें ऐसे सख्त बयान देने पड़ रहे हैं. आखिर लालू प्रसाद को ऐसा क्यों कहना पड़ रहा है? छह महीने के भीतर ये दूसरा वाकया है जब लालू को ऐसा सख्त रुख अख्तियार करना पड़ा है.

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लालू प्रसाद, राबड़ी देवी
लालू प्रसाद, राबड़ी देवी

"हमारा लड़का चुनाव नहीं लड़ेगा, तो क्या भैंस चराएगा?"

बिहार चुनाव में लालू प्रसाद रिंग मास्टर बने हुए हैं. फिर भी उन्हें ऐसे सख्त बयान देने पड़ रहे हैं. आखिर लालू प्रसाद को ऐसा क्यों कहना पड़ रहा है? छह महीने के भीतर ये दूसरा वाकया है जब लालू को ऐसा सख्त रुख अख्तियार करना पड़ा है.

बेटे को विरासत, बागी बाहर
इसी साल फरवरी में किशनगंज की एक सभा में पप्पू यादव ने खुद को लालू प्रसाद का असली वारिस करार दिया था. पप्पू ने कहा, "बेटा या बेटी होने से कोई वारिस नहीं हो सकता.

लालू मेरे लिए पिता तुल्य हैं. मैं आज जो कुछ भी हूं, वह लालू की ही देन है. लालू ने ही पूरे देश में सामाजिक न्याय को लेकर आंदोलन चलाया था, मैं उसकी ही देन हूं. इसलिए मैं ही लालू का सच्चा वारिस हूं."

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पप्पू की इस बात पर लालू को काफी गुस्सा आया. उन दिनों जनता परिवार के गठन की बात जोरों पर थी और उसी की एक मीटिंग में लालू ने साफ कर दिया कि वारिस तो बेटा ही होता है. बाद में लालू ने सार्वजनिक तौर पर बयान भी दिया, "भारतीय संस्कृति में बेटा ही पिता की विरासत संभालता है. इस कारण मेरे बाद पार्टी का उत्तराधिकारी पप्पू यादव नहीं, बल्कि मेरा बेटा होगा. मेरे इस फैसले से जिसे परहेज है, वह पार्टी छोड़कर जा सकता है."

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