बिहार में नतीजे जो भी हों. फिलहाल हर किसी को एक ही शख्स पतवार नजर आ रहा है, और वो है - . आखिर ऐसा क्यों है? क्योंकि मांझी के साथ बहुत सारे प्लस प्वाइंट हैं. मांझी ऐसे नेता हैं जो कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू तीनों ही पार्टियों में रह चुके हैं. इतना ही नहीं वो इन तीनों पार्टियों की सरकारों में मंत्री भी रह चुके हैं. उसके बाद मुख्यमंत्री बने.
वैसे मांझी के ताकतवर होने की तात्कालिक वजह उनका दलितों के नेता के रूप में उभरना है. ऐसे में हर पार्टी को लगता है कि जिस किसी को भी मांझी का सपोर्ट मिलेगा वो बीस तो पड़ेगा ही. अब ये मांझी पर ही निर्भर करता है कि वो ?
1. चाहें तो लालू के साथ हो लें - आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद ने मांझी को ताजा ताजा ऑफर दिया है. लालू का कहना है कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए सेक्युलर दलों को एकजुट होना चाहिए और इसी वजह से वो मांझी को साथ लेना चाहते हैं. नीतीश को घोषित करने से इंकार कर देने वाले लालू, संभव है, मांझी के नाम पर राजी भी हो जाएं. हालांकि उन्होंने पत्ते नहीं खोले हैं.
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