भविष्य का इंसान कैसा होगा? मतलब उसका रंग-रूप कैसा होगा? उसके शरीर का आकार कैसा होगा? हाल के दिनों में इसको लेकर कई सारी रिपोर्ट्स सामने आई हैं. जिसमें कहा जा रहा है कि भविष्य का मानव कुछ-कुछ एनिमिडेट फिल्म अवतार के कैरेक्टर की तरह होगा. जैसे कि उसके माथे का आकार अभी की तुलना में ज्यादा बड़ा होगा. आंखें ज्यादा बड़ी-बड़ी होंगी, जबकि मुंह पतला हो जाएगा और गर्दन अपेक्षाकृत और लंबी हो जाएगी. लेकिन क्या यह पूरी तरह सच है? यह जानने के लिए aaktak.in ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में बतौर रिसर्चर काम करने वाले एंथ्रोपोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश त्रिपाठी से बात की.
डॉ. त्रिपाठी बताते हैं कि हां ये जरूर है कि भविष्य का मानव, एनिमिटेड फिल्म अवतार के कैरेक्टर की तरह हो जाएगा. लेकिन सारे लोग ऐसे ही हो जाएंगे यह कहना ठीक नहीं होगा. क्योंकि मानव का आकार कई चीजों पर निर्भर करता है. जैसे कि भौगोलिक स्थिति, पर्यावरण और हमारी आवश्यकताएं.
वर्तमान समय में भी अगर हम अपने आस-पास देखें तो सभी लोग एक जैसे नहीं दिखाई देते. किसी की नाक लंबी होती है, तो किसी की आंख छोटी. मैदानी भाग के लोगों के चेहरे की बनावट और पहाड़ पर रहने वाले लोगों की बनावट अलग होती है. ये सब काफी हद तक भौगोलिक स्थिति पर भी निर्भर करता है.
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उन्होंने बताया, ह्यूमन इवोल्यूशन के बारे में हम जानते हैं कि कैसे मानव जाति का विकास हुआ. पहले हमारे पूर्वज पेड़ों पर रहा करते थे. फिर वो जमीन पर आए और धीरे-धीरे उन्होंने दो पैरों से चलना शुरू किया. शुरुआत में वे जंगली जानवरों का शिकार करते थे और कच्चा मांस खाया करते थे. इसलिए तब के लोगों के जबड़े और दांत बहुत ज्यादा मजबूत हुए करते थे. बाद में जब आग की खोज हुई तो हमने पके हुए भोजन खाने की शुरुआत की. यानी कि हमें सॉफ्ट खाने की आदत पड़ गई.

डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि कुछ ऐसे उदाहरण है जो बताते हैं कि हमारी शारीरिक संरचना काफी कुछ हमारी आवश्यकताओं पर भी निर्भर करती है. और समय के साथ ये घटती-बढ़ती रहती है. उन्होंने जैव विकास को लेकर जीन बैप्टिस्ट डी लैमार्क के सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि जीव व उनके अंगों में आकार वृद्धि की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है. वातावरण के अनुसार अधिक उपयोग में आने वाले अंग अधिक विकसित होने लगते हैं और कम उपयोग किए जाने वाले अंग धीरे-धीरे अवशेषी अंगों के रूप में रह जाते हैं.
भविष्य में तकनीक पर बढ़ेगी निर्भरता
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि जिस तरह हॉलीवुड फिल्म अवेंजर में आपने देखा होगा कि इंसान अपने शरीर के ऊपर एक ड्रेस पहने रहता है और उसमें स्क्रीन लगी रहती है. संभव है कि आने वाले समय में हमलोग भी उसी तरह सब कुछ स्क्रीन पर ही देख लें. ऐसे में आपकी आंखों का बड़ा होना स्वाभाविक है. क्योंकि आपने अपनी आंखों पर निर्भरता बढ़ा ली है. आपकी आईब्रो बोन बड़ी हो जाएगीं. जिससे आंखों को यूवी किरणों से सुरक्षा मिल सके.
उन्होंने कहा कि अभी के दौर में लोग घंटों कंप्यूटर पर बैठकर काम करते हैं. आने वाले समय में कंप्यूटर स्क्रीन की जगह गूगल ग्लासेस जैसे स्मार्ट तकनीक लेने जा रही है. जिसमें आपकी आखों पर एक चश्मानुमा ग्लास लगा होगा और लोग उसपर ही सारे अपडेट्स ले सकेंगे. इसके लिए आपको कोई फोन या कंप्यूटर कैरी करने की जरुरत नहीं पड़ेगी.
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कमजोर हो जाएंगे विलुप्त
क्या इस तरह के बदलाव आने से हमारी आंखें या गर्दन कमजोर हो जाएंगी? इस सवाल के जवाब में डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि डार्विन के सिद्धांत के अनुसार अगर कुछ भी प्रकृति के हिसाब से अच्छा नहीं होगा तो उसका सर्वाइवल मुश्किल हो जाएगा. यानी जो कमजोर होगा वो जिंदा नहीं रहेगा.
आप पहले के इतिहास भी देखें जो जीव समय के हिसाब से नहीं बदल पाए वो विलुप्त हो गए. इसलिए यह कहना कि भविष्य का मानव कमजोर हो जाएगा गलत है. हां ये कह सकते हैं कि भविष्य का मानव समय और जरूरतों के हिसाब से बदला हुआ होगा.
इंसानी चेहरे में 200 से ज्यादा एक्सप्रेशंस
डॉ. त्रिपाठी एक बात का बार-बार जिक्र करते वो है फेशियल चेंजेज. वो बताते है कि इंसानी चेहरे में कम से कम 200 से ज्यादा एक्सप्रेशंस होते हैं, जैसे-गुस्सा, हंसना, रूठना ये एक तरह की एक्सरसाइज होती है. आने वाले समय में हो सकता है लोग दुनिया से कट जाएं और उनकी लोगों के साथ बातचीत कम हो जाए. ऐसी स्थिति में भी आपके चेहरे में बदलाव होना स्वभाविक है.
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कैसा होगा भविष्य का मानव?
डॉ. त्रिपाठी कहते हैं कि यह लगभग तय है कि भविष्य के मानव का सिर बड़ा होगा. उनका माथा बड़ा होगा. चेहरा फ्लैट हो जाएगा. नाक बड़ी होगी, क्योंकि हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम होगी. वहीं नाक के नीचे वाला पार्ट, जैसे- जबड़ा वाला हिस्सा और ठुड्डी पतली हो जाएगी.
वर्तमान में इंसान की ठुड्डी 'U' शेप में है, जो आगे चलकर 'V' शेप होता चला जाएगा. क्योंकि भविष्य में संभव है कि हमारी डाइट पूरी तरह से लिक्विड हो जाए. तो आपके दांतों या जबड़े का प्रयोग काफी हद तक समाप्त हो जाएगा.
गर्दन लंबी हो जाएगी. इसके अलावा स्कीन का कलर और साफ हो जाएगा. इंसान की हाइट अभी की तुलना में ज्यादा हो जाएगी. अभी 5.8 फीट औसत लंबाई मानी जाती है आगे चलकर यह 6.2 फीट के करीब हो सकती है.
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आकार बदलने में लगेगा 500 वर्ष का समय
मानव शरीर का आकार बदलने में कितना समय लग सकता है, इस सवाल के जवाब में डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि ये एकदम से होने वाली प्रक्रिया नहीं है, इसमें बीसयों पीढ़ी या लगभग 500 वर्ष का समय लग सकता है. भविष्य में हो सकता है कि हमारी जरूरतें सिमट जाएं. जिसके कारण हमारे शरीर में काफी बदलाव हो सकते हैं.
ये बदलाव हमारा तकनीक के ऊपर निर्भरता के कारण भी हो सकता है. तकनीक लगातार एडवांस हो रही है. ऐसे में हमारी निर्भरता तकनीक पर बढ़ती जा रही है. आधुनिकता की ओर बढ़ने से हमारी शारीरिक गतिविधियां भी सिमटने लगेंगी. जाहिर सी बात है इसका असर हमारे शारीरिक ढांचे पर भी पड़ेगा.