scorecardresearch
 

पूर्व ISRO चीफ बोले- जल्द सबके मोबाइल पर होगा भारतीय GPS, कंपनी ने किया प्रयोग

डॉ. ए.एस किरन कुमार ने कहा कि डीजीसीए की तरह ही हमारे मोबाइल पर नाविक (The Indian Regional Navigation Satellite System - NAVIC) आएगा. इसकी कोई तय तारीख अभी नहीं बता सकता लेकिन मैं यह भरोसा दिला सकता हूं कि यह बेहद जल्द सबके मोबाइल पर होगा. पूर्व इसरो प्रमुख ने ये बात हैदराबाद में आयोजित जियोस्मार्ट इंडिया में aajtak.in से खास बातचीत में कही.

पूर्व इसरो चीफ डॉ. ए.एस किरन कुमार पूर्व इसरो चीफ डॉ. ए.एस किरन कुमार

  • जल्द सबके मोबाइल पर होगा भारतीय GPS
  • पूर्व ISRO चीफ किरन कुमार ने किया खुलासा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization - ISRO) के पूर्व चीफ डॉ. ए.एस किरन कुमार ने कहा है कि बहुत जल्द सभी देशवासियों के मोबाइल पर भारतीय जीपीएस (Global Positioning System - GPS) होगा. भारत में एक मोबाइल कंपनी इसे उपयोग में ला चुकी है. डॉ. ए.एस किरन कुमार ने कहा कि अभी भारत सरकार यह सोच रही है कि इसे सभी मोबाइल कंपनियों के लिए कैसे उपयोग में लाने लायक बनाया जाए. जैसे डीजीसीए ने गगन का उपयोग किया है.

डॉ. ए.एस किरन कुमार ने कहा कि डीजीसीए की तरह ही हमारे मोबाइल पर नाविक (The Indian Regional Navigation Satellite System - NAVIC) आएगा. इसकी कोई तय तारीख अभी नहीं बता सकता लेकिन मैं यह भरोसा दिला सकता हूं कि यह बेहद जल्द सबके मोबाइल पर होगा. पूर्व इसरो प्रमुख ने ये बात हैदराबाद में आयोजित जियोस्मार्ट इंडिया में aajtak.in से खास बातचीत में कही.

इसरो का पहला काम समाज के काम आना है

पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. ए.एस किरन कुमार ने कहा कि इसरो का काम सिर्फ अंतरिक्ष में खोज नहीं है. उसका सबसे बड़ा काम है लोगों और समाज के काम आना. ताकि देश के लोगों की रक्षा हो सके और विकास हो सके. इसलिए इसरो पहले संचार, मौसम, ढांचागत विकास के लिए काम करता है फिर इसके बाद कोई और काम.

कार्टोसैट-3 अब तक सबसे शानदार सैटेलाइट है

पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. ए.एस किरन कुमार ने कहा हाल ही में छोड़ा गया कार्टोसैट-3 सैटेलाइट अपनी सीरीज का सबसे बेहतरीन सैटेलाइट है. इससे मिलने वाली तस्वीरों का उपयोग शहरी विकास, सड़क-रेल निर्माण, ब्रिज-पुल निर्माण और भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों पर नजर रखने का भी है.

जल्द आएगा जियोस्टेशनरी सैटेलाइट, देखेगा बादलों के पार भी

पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. ए.एस किरन कुमार ने कहा कि बहुत जल्द इसरो एक जियोस्टेशनरी सैटेलाइट छोड़ने वाला है. यह बेहद ताकतवर सैटेलाइट होगा जो खराब मौसम में भी सिर्फ भारत ही नहीं पड़ोसी देशों पर भी नजर रखने में सक्षम होगा. इसकी सबसे बड़ी ताकत यह होगी कि यह बादल हो या धुंध, कितना भी खराब मौसम हो यह बेहतरीन तस्वीरें ले पाएगा.

इसरो आम लोगों को उन्हीं की भाषा में समझाता है

पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. ए.एस किरन कुमार ने बताया कि इसरो की वैज्ञानिक भाषा कई बार आम लोगों के समझ में नहीं आती. लेकिन जब बात जियोस्पेशियल फैसिलिटी (भूस्थानिक सुविधाओं) की होती है तब हम लोगों के पास जाते हैं और उन्हें उनकी भाषा में समझाते हैं. जैसा कि गुजरात में मिशन सुजलाम के समय किया था. हमने गांव के लोगों को समझाने के लिए ग्राम सभा में रंगोली बनाई थी. उसी के जरिए इस मिशन के बारे में समझाया था.

आम आदमी जानता नहीं है, पर जियोस्पेशियल यूज करता है

आम आदमी ये नहीं जानता कि जियोस्पेशियल क्या होता है? लेकिन हर दिन वो उसी का इस्तेमाल करता है. जैसे जीपीएस से किसी एक जगह से दूसरी जगह जाना. जैसे ऑनलाइन ऐप से खाना मंगाना वह भी यह देखते हुए कि उसका खाना अभी कहां पहुंचा. ऑनलाइन ऐप से टैक्सी मंगाना फिर उसपर नजर रखना कि वह सही रास्ते पर जा रहा है कि नहीं. यानी हर वो काम जिसके साथ आप लोकेशन जोड़ देते हैं वह जियोस्पेशियल ही होता है.

चंद्रयान-3 और विक्रम लैंडर पर क्या बोले पूर्व इसरो प्रमुख?

इस सवाल पर पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. ए.एस किरन कुमार ने कहा कि यह बात तो सही मायने में वर्तमान इसरो प्रमुख डॉ. के. सिवन ही बता सकते हैं. नासा के LRO द्वारा चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का कचरा खोजे जाने के सवाल पर किरन कुमार ने कहा कि अभी उन्होंने यह रिपोर्ट नहीं देखी है. देखने के बाद ही कुछ बोल सकता हूं. 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें