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टूटी सदियों पुरानी परंपरा, शनि शिंगणापुर मंदिर में पहली बार महिला चुनी गई अध्यक्ष

मुंबई के शिंगणापुर स्थित प्रसिद्ध धर्मस्थल श्री शनि मंदिर के ट्रस्ट में पहली बार महिलाओं को जगह मिली है. अनिता शेटे नाम की एक महिला को मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष चुना गया है.

मुंबई का शिंगणापुर श्री शनि मंदिर मुंबई का शिंगणापुर श्री शनि मंदिर

मुंबई के शिंगणापुर स्थित लोकप्रिय धर्मस्थल श्री शनि मंदिर के ट्रस्ट में पहली बार महिलाओं को जगह दी गई है.  अनिता शेटे नाम की एक महिला को ट्रस्ट का अध्यक्ष चुना गया है.

शनि शिंगणापुर के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में महिला को विजयी घोषित कर उनकी नियुक्ति की बात कही गई है. आपको बता दें कि शनि शिंगणापुर एक ऐसा मंदिर है जहां पूजन स्थल पर महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाता है.

अनीता शेटे और शालिनी लांडे बनीं ट्रस्टी
मंदिर ट्रस्ट में बतौर सदस्य चुनी गईं अनीता शेटे और शालिनी लांडे पर ऐतिहासिक जिम्मेदारी आ गई है. यह दोनों महिलाएं शिंगणापुर के प्रसिद्ध शनि मंदिर में ट्रस्टी चुनी गई हैं. 400 वर्ष पुराने मंदिर की ट्रस्टी बनने वाली ये पहली महिलाएं हैं.

परंपरा और नियमों के बदले जाने की संभावना
मंदिर के ट्रस्ट में नई कार्यकारिणी के चुनाव के लिए इस बार 98 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे थे जिसमें 10 महिलाएं शामिल थीं. न्यासी बोर्ड में सदस्यों के चुनाव का अधिकार धर्मादाय आयुक्त को होता है. सदस्यों के चयन की प्रक्रिया मुलाकात के जरिए पूरी होती है. इस बार दो महिलाओं का चयन किया गया है. दो महिलओं के चयन होने से शनि मंदिर में परंपरा और नियमों के बदले जाने की संभावना है.

मंदिर में महिलाओं की आवाज उठाने का बीड़ा
ये महिलाऐं शिंगणापुर के लोकप्रिय शनि मंदिर में बतौर ट्रस्टी चुनी गई हैं. शनि मंदिर की ट्रस्टी बनने वाली यह दोनों पहली महिलाएं हैं. हालांकि इन महिलाओं से यह उम्मीद और अपील की गई है कि वे पुरुषों के हाथों की गुड़िया न बनकर महिला श्रद्धालुओं को शनिपूजा का अधिकार दिलवाने का कार्य करें. शनि शिंगणापुर के मंदिर में पूजन स्थल पर महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाता है. इन महिलाओं के चयन को लेकर क्षेत्र में उत्साह है. इसे एक अच्छा कदम माना जा रहा है.

मंदिर में महिला के प्रवेश पर हुआ था बवाल
पिछले साल नवंबर महीने में इस शनि मंदिर के चबूतरे पर एक महिला के प्रवेश करने पर काफी हंगामा हुआ था. मंदिर के पुजारियों और गांव के लोगों ने मंदिर का शुद्धिकरण किया था. परंपरा का हवाला देते हुए कहा गया था कि शनि मंदिर के चबूतरे पर महिलाओं का प्रवेश वर्जित है.

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