बाल वीरता पुरस्कार के लिए देशभर से चुने गए 21 बच्चे राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल नहीं हो सकेंगे. ऐसा देश में 1957 के बाद पहली बार हो रहा है.
इन बच्चों को चुनने वाली इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर (आईसीसीडब्ल्यू) पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने के चलते ये फैसला लिया गया है. उसके बाद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने काउंसिल से अपने आपको अलग कर लिया है. उस सबका खामियाजा 21 बहादुर बच्चों को भुगतना पड़ेगा.
आजतक से बातचीत के दौरान बच्चों को परेड में शामिल नहीं करने के सवाल पर काउंसिल की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने कहा कि परेड में शामिल होने के लिए इनके बच्चों को इस बार कोई न्योता नहीं मिला है. रक्षा मंत्रालय ने अभी तक लिखित में कोई सूचना नहीं दी है.
उन्होंने कहा कि मंत्रालय अगर अलग से अवॉर्ड दे रही है तो यह बहुत ही खुशी की बात है, लेकिन हमारा यह प्रोग्राम पिछले 61 सालों से चल रहा है. हम देश भर से बहादुरी दिखाने वाले बच्चों को अवार्ड देते रहे हैं. मुझे इस बात का दुख है कि बच्चे शायद इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल न हों.
उनका कहना है कि उन्हें अभी भी उम्मीद है कि बहादुर बच्चों के हित में सरकार सही कदम उठाएगी. क्योंकि चुने गए बच्चों में दो ऐसे बच्चे भी हैं जिन्होंने सुंजवां कैप में आतंकी हमले के दौरान आतंकियों से मुकाबला करते हुए आतंकियों के हमले में कई लोगों की जान बचाई.
जानिए कौन हैं वे 21 बहादुर बच्चे और उनकी कहानी
गुरुगु हिमाप्रिया, भारत अवार्ड
10 फरवरी 2018 को आतंकियों ने सुंजवां आर्मी कैंप में हमला कर दिया लगातार आतंकी फायरिंग कर रहे थे और घर में घुसने की कोशिश कर रहे थे. उसी दौरान एक जवान की बेटी हिमाप्रिया ने अपनी मां के साथ आतंकियों का विरोध किया.
काफी देर टकराव के बाद आतंकी ने अंदर एक ग्रेनेड फेंका. जिससे हिमा प्रिया के बाएं हाथ में काफी घाव हो गए उसकी मां भी गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर गई. बहादुरी के साथ लड़ते हुए इस भारत की बेटी ने आतंकियों के दांत खट्टे कर दिए. इसके इस अनुकरणीय साहस के लिए हिमा प्रिया को इस साल भारत अवॉर्ड दिया गया.
सौम्यादीप जना, भारत अवार्ड
सौम्यदीप जना ने बहादुरी दिखाते हुए सुंजवां आर्मी कैंप में तीन आतंकियों ने जब हमला कर दिया तो उस दौरान अपने परिवार के साथ सुंजवां कैंप में रुके हुए थे. शोरगुल सुनकर सौम्य दीप ने अपनी जान की परवाह किए बगैर अपनी मां और बहन को अंदर कमरे में धकेल दिया और दरवाजा बंद कर दिया. गोलीबारी करते हुए आतंकियों ने बंद दरवाजा तोड़ने की कोशिश की, लेकिन दीप ने स्टील का संदूक दरवाजे पर अड़ा दिया. आतंकियों से जान बचाने के लिए सौम्यदीप के शरीर का एक हिस्सा पैरालाइज हो गया. उसकी इस बहादुरी को देखते हुए इस साल वीरता का पुरस्कार दिया गया है.
नीतिशा नेगी, गीता चोपड़ा अवॉर्ड(मरणोपरांत)
नितिशा नेगी अंडर 17 फुटबॉल टीम के सदस्य के रूप में पेसिफिक स्कूल गेम्स में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया गई हुई थी. 10 दिसंबर 2017 को वह अपनी सहेलियों के साथ एलीलाड बीच पर गई. अचानक एक बड़ी लहर आने से कुछ लड़कियां घबरा गई और उनका संतुलन बिगड़ गया. उसी समय नितिशा की नजर उसकी सहेली अनन्या पर पड़ी. अनन्या मदद के लिए चिल्ला रही थी. नितिशा ने तुरंत अपनी सहेली को सुरक्षित स्थान पर धकेल दिया. इससे अनन्या की जान बच गई. अपनी जान की परवाह न करते हुए दूसरे की जान बचाने के लिए नीतिशा को गीता चोपड़ा अवॉर्ड दिया गया.
गोहिल जयराज सिंह, संजय चोपड़ा अवॉर्ड
गुजरात के गोहिल जयराजसिंह अजीत सिंह को इस साल संजय चोपड़ा अवॉर्ड दिया गया है. 6 साल और 5 महीने का गोहिल जयराजसिंह अपने दोस्त नीलेश के साथ खेल रहा था. अचानक एक तेंदुए ने आकर नीलेश पर हमला कर दिया. नीलेश को तेंदुए के कब्जे में देखकर जयराज ने एक पत्थर उठाया और तेंदुए के मुंह पर मारा. इसके बावजूद तेंदुए ने अपनी पकड़ नहीं छोड़ी. तब जयराज ने अपनी खिलौना कार, जिससे वह खेल रहा था, उठाकर तेंदुए की तरफ फेंकीं. उसकी आवाज से तेंदुआ हैरान हो गया और नीलेश को छोड़कर भाग गया. अपनी जान जोखिम में डालकर अपने दोस्त को बचाने के लिए वीरता पुरस्कार संजय चोपड़ा अवॉर्ड गोहिल जयराज सिंह को दिया गया है.
कहानी हिमाचल की मुस्कान और सीमा की
मुस्कान और सीमा की कहानी ही काफी अलग है. हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूल की छात्राओं ने अपने स्कूल प्रिंसिपल को शिकायत की थी कुछ लड़के स्कूल आते-जाते समय उनका रास्ता रोकते हैं और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं. इतना ही नहीं, उनके साथ भद्दी भाषा में अपशब्द का इस्तेमाल करते हुए उनके सामने अश्लील हरकतें भी की जाती हैं.
10 जुलाई 2017 को मुस्कान और अपनी सहेलियों के साथ स्कूल जा रही थी. इस दौरान की गई बदतमीजी के बाद दोनों लड़कियों ने उस आदमी को ललकारा. इसके बाद उसकी जमकर धुनाई की और केस भी दर्ज कराया.
बहादुरी की मिसाल कर्नाटक के सीडी कृष्णा नायक और छत्तीसगढ़ के रितिक साहू और झगेंद्र साहू ने भी दिखाई है.
वहीं, उत्तर प्रदेश के दिव्यांश सिंह ने भी एक गुस्साए बैल से अपनी बहन की जान बचाई थी. इसके लिए भी दिव्यांश सिंह को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिया गया है.
साथ ही मणिपुर के बहेंगमबम सिंह और उड़ीसा की रंजीता माझी को भी वीरता पुरस्कार दिया गया है.
जिन 21 बच्चों को वीरता पुरस्कार दिया गया है, उनमें से मनदीप कुमार पाठक दिल्ली के हैं. विश्वजीत पुहांन उड़ीसा से हैं. श्रीकांत गंजीर छत्तीसगढ़ और शिलिंग के केरला के हैं. 9 साल 11 महीने के अश्विन सजीव केरला से हैं, उनको भी वीरता पुरस्कार दिया गया है.
यही नहीं, आईसीसीडब्ल्यू के जरिए ऐसे ही कई बहादुरी के अवॉर्ड हर साल दिए जाते हैं. जिसमें अनिका जैमिनी, कमेलिया केथी खरबार को बापू गैधानी अवॉर्ड दिया गया. इन लड़कियों की बहादुरी के चलते यह वीरता का पुरस्कार इनको दिया गया है. इसके अलावा उड़ीसा की रहने वाली सीतू मलिक और झीली बागको भी इस साल राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिया गया है.