कोरोना मरीजों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में लाखों रुपए वसूल करने को रोकने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले सम्बन्धित हाई कोर्ट में जाएं. इस पर याचिकाकर्ता की ओर से वकील आनन्द ग्रोवर ने कहा कि हाई कोर्ट ना भेजा जाए.
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एसए बोबडे ने कहा कि हम तय करेंगे कि इस मामले में न्याय का शासन कैसे लागू हो. हम सॉलिसिटर जनरल से कह सकते हैं कि सभी राज्य सरकारों को लिखें कि आपदा प्रबन्धन एक्ट के तहत इलाज का शुल्क तय करते समय गुजरात मॉडल का अनुकरण करें.
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सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि हम ये नहीं चाहते कि कोरोना पीड़ितों का इलाज मुफ्त हो, लेकिन लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा और इलाज सुलभ तो होना चाहिए. आप सर्वश्रेष्ठ, सुलभ सरल मॉडल तय कर लें. किसी राज्य में अगर सफल मॉडल दिख रहा हो तो उसे भी शामिल करते हुए समग्र गाइड लाइन बनाई जा सकती है.
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कोर्ट ने दिया था कमेटी बनाने का निर्देश
इससे पहले कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को डॉक्टरों और विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया था, जो कोरोना अस्पताल में मरीजों के इलाज पर नजर रखेगी. इसके साथ ही यह कमेटी समय समय पर अस्पतालों को जरूरी निर्देश भी देगी.
तीमारदारों को अस्पताल में रहने की मिले इजाजत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोरोना मरीज की इच्छा पर अस्पताल प्रशासन को उनके तीमारदार को अस्पताल में रहने की इजाजत देनी होगी. हालांकि इस दौरान तीमारदार केवल उसी स्थान पर रह सकेंगे, जहां पर अस्पताल प्रशासन उनसे रुकने के लिए कहेगा. इसी के साथ सभी अस्पतालों को अपने यहां एक हेल्प डेस्क बनाना होगा.