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PM और वित्त मंत्री के पास सोच नहीं, नीति-दिशा दोनों गलत: कांग्रेस

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी और केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने आरबीआई से लेकर मालेगांव ब्लास्ट और सरदार पटेल की मूर्ति लगाने के मुद्दे पर सरकार से कई सवाल पूछे.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो-रॉयटर्स)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो-रॉयटर्स)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था को चरमरा दिया है, क्योंकि पीएम और वित्त मंत्री के पास सोच नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार की नीति और दिशा दोनों गलत है. उन्होंने पूछा कि नोटबंदी की चोट के लिए वित्त मंत्री किस पर निशाना साधेंगे, पीएम पर या आरबीआई पर.

शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश की सभी संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से चोट पहुंचाई है. जिन संस्थाओं पर अर्थव्यवस्था और सुरक्षा का जिम्मा है, उन पर सरकार की चोट लगी है. हमने सरकार को पहले ही आगाह किया था कि जो संस्थाएं स्वायत्त हैं, उनके काम में सरकार की दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए. शिक्षा संस्थाओं में भी निरंतर हस्तक्षेप हुआ. कॉलेज, यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी अपने स्वतंत्र विचार नहीं रख पा रहे.'

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शर्मा ने कहा, 'गंभीर बात यह है कि सरकार का निशाना रिजर्व बैंक पर है. रिजर्व बैंक की अटॉनमी पर बड़ा हमला हो रहा है. भारत के रिजर्व बैंक ने कई दशकों से अच्छा काम किया है, इसलिए उसकी आजादी पर हमला नहीं होना चाहिए पर इस सरकार ने रिजर्व बैंक को वह अनुमति नहीं दी. शर्मा ने कहा, वित्तीय दशा की ओर रिजर्व बैंक ने सरकार का ध्यान दिलाया लेकिन देश के वित्त मंत्री ने आरबीआई की आलोचना की है. उन्होंने आरबीआई पर निशाना साधा है.'

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'वित्त मंत्री को यह बताना चाहिए कि जब उनकी सरकार बनी तो देश में एनपीए 3 लाख करोड़ थी, आज 12 लाख करोड़ है. सरकार को बताना चाहिए कि 2014 के बाद 9 लाख करोड़ की बढ़ोतरी कैसे हुई. यह जिम्मेदारी किसकी है. यह सरकार मॉनिटरी पॉलिसी अपने कब्जे में लेना चाहती है. पेमेंट रेगुलेटर रिजर्व बैंक है. वित्त मंत्रालय उसे अपने कब्जे में नहीं ले सकता. वह ऐसी कोई संस्था नहीं बना सकता जो भारत देश का पेमेंट रेगुलेटर बने. सरकार नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कॉरपोरेशंस के लिए अलग से खिड़की खोलना चाहती है ताकि उन्हें पैसे दिए जा सकें.'

शर्मा ने कहा, ऐसे लोग जो बैंकिंग के बारे में ज्ञान नहीं रखते उन्हें रिजर्व बैंक का डायरेक्टर बना दिया गया. इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के नाम पर, नॉन ऑफिशियल डायरेक्टर के नाम पर जो रिजर्व बैंक की सब कमेटी में बैठकर फैसलों का प्रभावित करते हैं. इसीलिए रिजर्व बैंक के लोगों को चिंता है कि इस संस्था को कमजोर नहीं किया जाए.

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शिवराज सिंह और रमन सिंह के बारे में भी कांग्रेस नेता ने बड़ा हमला किया. उन्होंने कहा कि तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं. रमन सिंह के पुत्र का नाम पनामा पेपर में आया है. शिवराज सिंह भी कोई दूध के धुले नहीं हैं. उनका चादर दागदार है. रमन सिंह, शिवराज सिंह में गड़बड़ी हो गई लेकिन ये कोई बड़ी बात नहीं है. जिस देश का प्रधानमंत्री हमेशा कंफ्यूज रहता हो. उन्होंने गोरखनाथ, नानक देव और संत कबीर को एक साथ बिठा दिया. बीजेपी को पहले अपने प्रधानमंत्री को समझाना चाहिए. राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं हैं.

मालेगांव ब्लास्ट मामले में उन्होंने कहा कि भगवा शब्द बीजेपी की बपौती नहीं है. ये उन लोगों की वारिस हैं जिन्होंने अंग्रेजों का साथ दिया और स्वतंत्रता संग्राम के विरोध किया. भारत कई सालों से आतंकवाद का शिकार रहा है. उनकी पुरजोर निंदा होनी चाहिए और उसे हराना चाहिए. घटनाओं का जो भी दोषी हो उसे सजा मिलनी चाहिए लेकिन उसे किसी धर्म, रंग आदि से नहीं जोड़ना चाहिए.

सरदार पटेल की मूर्ति के बारे में शर्मा ने कहा कि उनके पास अपने नेता तो हैं नहीं. पटेल कांग्रेस के अध्यक्ष थे. प्रधानमंत्री जी चीन की मदद से मूर्ति तो लगा रहे हैं लेकिन साथ में मूर्ति के नीचे पटेल का गोलवलकर के साथ हुए पत्राचार को भी छपवा दें.

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