चीन ने आखिरकार 30 श्रद्धालुओं के 15वें जत्थे को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए वीजा दे दिया है. चीन से वीजा मिलने के बाद ये श्रद्धालुओं दिल्ली से रवाना हो गए हैं. इससे पहले चीन ने 30 श्रद्धालुओं के 15वें जत्थे को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए वीजा देने पर अड़ंगा लगा दिया था. इसमें विदेश मंत्रालय के 2 अधिकारी भी शामिल थे. इस जत्थे को बुधवार को चीन के लिए निकलना था, लेकिन मंगलवार रात श्रद्धालुओं को चीन ने वीजा नहीं दिया.
इस जत्थे में शामिल कुछ श्रद्धालुओं ने इंडिया टुडे को बताया कि उन्हें अधिकारियों ने बताया कि यात्रा में देरी हो सकती है. वहीं जब अन्य श्रद्धालुओं से इस बारे में पूछा गया तो उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी. वहीं चीन के आधिकारिक सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया था कि वीजा अभी अंडर प्रॉसेस है, इस पर हेडक्वार्टर से अनुमति का इंतजार किया जा रहा है.
सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि इस प्रकार का वीजा यात्रा से एक दिन पहले यात्रियों को दिया जाता है. विदेश मंत्रालय ने बताया कि वीजा देने पर विचार किया जा रहा है. वहीं दो जत्थे कैलाश मानसरोवर के लिए बुधवार को रवाना हो गए हैं. उन्होंने बस और क्रॉसओवर के जरिए लिपुला पास से चीन में एंट्री की है.
इस साल नाथुला मार्ग से 10 और लिपुलेख मार्ग से कुल 18 यात्री दलों के जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है. नाथुला मार्ग से प्रत्येक बैच में 50 यात्री और परंपरागत लिपुलेख मार्ग से प्रत्येक बैच में 60 यात्रियों को ले जाया जाएगा.
गौरतलब है कि कैलाश मानसरोवर तिब्बत में कैलाश माउंटेन रेंज में 21,778 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. हिंदू इसे भगवान शिव का निवास स्थान मानते हैं. 1981 से ही इस यात्रा में आईटीबीपी ने केंद्रीय भूमिका निभाई है. आइटीबीपी कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए सुरक्षा, संचार और चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध करवाती है और भारतीय क्षेत्र में यात्रियों की सुगम यात्रा का हर संभव प्रयास करती है.