बिहार में लू और चमकी बुखार से मौतें हो रही हैं. चमकी बुखार से ही 135 बच्चों की मौत हो चुकी है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वास्थ्य प्रणाली में कमियों के कारण हो रही मौतों पर संज्ञान लिया है. इसको लेकर आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और भारत सरकार को नोटिस जारी किया है. साथ ही चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है. लेकिन उन करोड़ों बच्चों का क्या जो अपना पांचवां जन्मदिन भी नहीं मना पाए. इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
वर्ष 2008 से 2015 के बीच भारत में 1.11 करोड़ बच्चे अपना पांचवा जन्मदिन नहीं मना पाए. चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इनमें से 62.40 लाख बच्चे जन्म के पहले महीने (जन्म के 28 दिन के भीतर) में ही दुनिया छोड़कर चले गए. यानी बच्चों की कुल मौतों में से 56% बच्चों की मौत नवजात अवस्था में ही हो गई. वर्ष 2015 में हर घंटे 74 नवजात शिशुओं का दिल काम करना बंद कर रहा था. जबकि, 2008 से 2015 के बीच हर घंटे औसतन 89 नवजात शिशुओं की मृत्यु होती रही है. ये जानकारी भारत सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) से मिली है. लेकिन 2006 से 2017 तक के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि इतनी मौतों के बाद भी देश में शिशु मृत्यु दर में कमी आई है.
घट रही है नवजात बच्चों की मृत्यु दर
अगर 2006 से 2017 तक नवजात मृत्यु दर को देखें तो पता चलता है कि 2006 में नवजात मृत्यु दर प्रति हजार 57 था, जो 2017 में घटकर 33 प्रति हजार हो गया. यानी 11 सालों में 42% की कमी आई है. लेकिन, अब भी देश में नवजात मृत्यु दर वैश्विक स्तर से ज्यादा है. वैश्विक नवजात मृत्यु दर 29.4% है, जबकि देश में 33 है.
सबसे ज्यादा नवजात मृत्यु दर वाले छह राज्य
सबसे कम नवजात मृत्यु दर वाले छह राज्य
नवजात मृत्यु दर में अच्छा सुधार लाने वाले राज्य
नवजात मृत्यु दर में कई राज्यों ने सुधार लाने का अच्छा प्रयास किया है. जानिए उनके बारे में...
पड़ोसी देशों की तुलना में भारत की स्थिति
2008 से 2015 तक किस राज्य में कितने नवजात की मौत
देश के चार राज्यों (उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान) में देश की कुल नवजात मौतों की संख्या में से 56 प्रतिशत मौतें दर्ज होती हैं.
2008 से 2015 के दौरान देश में 91 लाख बच्चे पहला जन्मदिन ही नहीं मना पाए. इस अवधि में शिशु मृत्यु दर 53 से घट कर 37 पर आई है. लेकिन वर्ष 2015 में ही 9.57 लाख बच्चों की मृत्यु हुई थी. भारत के चार राज्यों - उत्तरप्रदेश (24.37 लाख), बिहार (10.3 लाख), मध्यप्रदेश (8.94 लाख) और राजस्थान (7.31 लाख) में सबसे ज्यादा संकट की स्थिति है. हालांकि, आंध्रप्रदेश (5.11 लाख), गुजरात (4.13 लाख), महाराष्ट्र (3.96 लाख) और प. बंगाल (3.68 लाख) की स्थिति भी दर्दनाक है.
देश में छोटे बच्चों की मौत के सबसे बड़े कारण
वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय अध्ययनों से नवजात शिशु मृत्यु दर के 4 प्रमुख कारण पता चले है.
SRS के मुताबिक भारत में शिशुओं की मौत का कारण
देश में कम लोग कराते हैं मृत्यु का पंजीयन
देश में अब भी शिशु मृत्यु की पंजीकृत संख्या और अनुमानित संख्या में बड़ा अंतर दिखता है. क्योंकि स्वास्थ्य व शासन व्यवस्था के बीच समन्वय नहीं है. मृत्यु का पंजीयन कम होता है. एसआरएस की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में भारत में 76.6% मृत्युओं का ही पंजीयन हुआ. बिहार में मृत्यु के 31.9%, मध्यप्रदेश में 53.8%, उत्तरप्रदेश में 44.2%, और प. बंगाल में 73.5% पंजीयन हुए.