दिग्गज थियेटर अभिनेता पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर का निधन हो गया है. वह 79 वर्ष के थे. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव स्थित अपने पैतृक गांव में उन्होंने आखिरी सांस ली.
हबीब तनवीर के नाटक 'चरणदास चोर' में शानदार अभिनय के लिए उन्हें रंगमंच की दुनिया में खासी प्रसिद्धि मिली. एडिनबरा के प्रतिष्ठित नाट्य समारोह में जब चरणदास चोर को सर्वश्रेष्ठ नाटक का पुरस्कार मिला तो उसके लीड एक्टर गोविंदराम निर्मलकर ही थे.
1971 में जुड़े थे 'नया थियेटर' से
निर्मलकर को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोक-रंगमंच 'नाचा' में भी महारत हासिल थी. वह 1971 में हबीब तनवीर के
'नया थियेटर' से जुड़े. यह वो समय था जब हबीब अपने थियेटर ग्रुप को नए सिरे से खड़ा करने में लगे हुए थे. 2005 में
अपनी रिटायरमेंट तक वह 'नया थियेटर' के लीड एक्टर रहे.
उनकी सबसे यादगार भूमिका 'चरणदास चोर' में ही रही. देश भर में कई साल तक इस नाटक का प्रदर्शन होता रहा. बाद में श्याम बेनेगल ने इसे अपने कैमरे में भी दर्ज किया. इसके अलावा तनवीर के अन्य नाटकों जैसे, मिट्टी की गाड़ी, लाला सोहरत राय, आगरा बाजार, बहादुर कलारिन, पोंगा पंडित, जिने लाहौर नी वेख्या में भी उन्होंने अहम भूमिकाएं निभाई हैं.
पद्मश्री लौटाना चाहते थे निर्मलकर!
2009 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया था. लेकिन विडंबना ही रही कि इतना शानदार कलाकार अपने आखिरी
समय में मुश्किल आर्थिक हालात और लकवे की बीमारी से जूझता रहा. ऑनलाइन पोर्टल 'रविवार' में छपी एक रिपोर्ट के
मुताबिक, अपनी दवाइयां खरीदने और गृहस्थी की गाड़ी चलाने के चक्कर में वह लाख रुपये के कर्ज में डूब गए थे और
आजीविका के लिए मामूली सी सरकारी पेंशन का ही सहारा था. 2010 में तो परेशान होकर उन्होंने पद्मश्री लौटाने तक
की बात कह डाली थी.