Chandra Grahan 2023: साल का पहला चंद्र ग्रहण खत्म हो चुका है. यह पांच मई को रात 08 बजकर 44 मिनट से शुरू हुआ था और रात 06 मई रात 1 बजकर 02 मिनट पर खत्म हो गया है. चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 15 मिनट रही थी. यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण था.
यहां देखें चंद्र ग्रहण का लाइव अपडेट
Today’s penumbra #LunarEclipse at its maximum point as seen from #EastDelhi-#Ghaziabad border
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•It was a amazing experience and this wraps up todays eclipse watch.#LunarEclipse2023 pic.twitter.com/NTrPyHvlXu


साल का पहला चंद्र ग्रहण 08.44 बजे से लग चुका है. यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण है जिसमें चांद के आकार में कोई भी बदलाव नहीं देखने को मिलता है बल्कि चांद की सतह पर एक धुंधली सी परत चढ़ी हुई दिखाई देती है. यह ग्रहण रात 01 बजकर 02 मिनट पर खत्म हो जाएगा.
The Penumbra #LunarEclipse is about to being!!! https://t.co/jG6n5ejPpb pic.twitter.com/v7pxznnQrV
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ऐसी मान्यता है कि किसी भी ग्रहण में ईष्ट देवी-देवता का ध्यान और उनसे संबंधित मंत्रों का जाप करना काफी लाभदायक होता है. चंद्र ग्रहण पर आप महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र और चंद्रमा के मंत्रों का जाप कर सकते हैं. ग्रहण के दौरान खाना बनाना और खाना भी वर्जित होता है.
आज बुद्ध पूर्णिमा पर साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण लग चुका है. यह ग्रहण देर रात लगभग 01 बजे तक चलेगा. 130 साल बाद बुद्ध पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगा है. 15 दिनों के अंतराल पर यह दूसरा ग्रहण है. आपको बता दें कि 20 अप्रैल को साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लगा था.
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ग्रहण काल में मंत्र जाप, स्तुति और ध्यान करना विशेष लाभकारी होता है. आप ग्रहण के दौरान 'ओम नम: शिवाय' या चंद्रमा के मंत्र का भी जाप कर सकते हैं. इस अवधि में की गई आराधना निश्चित रूप से स्वीकार होती है. यदि आप कोई मंत्र सिद्ध करना चाहते हैं या दीक्षा लेना चाहते हैं तो वह भी ग्रहण काल में काफी शुभ होता है. ग्रहण के बाद स्नान करके किसी निर्धन को कुछ न कुछ दान अवश्य करें.
साल का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई दिन यानी आज लगने वाला है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, यह ग्रहण तुला राशि और स्वाति नक्षत्र में लगेगा. चंद्र ग्रहण 130 साल बाद बुद्ध पूर्णिमा के महासंयोग में लग रहा है. यह विशिष्ट ग्रहण न होकर एक उपछाया ग्रहण है. क्योंकि साल का पहला चंद्र ग्रहण तुला राशि में ही लग रहा है इसलिए इस राशि के लोगों को सावधान रहने की जरूरत है.
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी का कहना है कि यह चंद्र ग्रहण 130 साल बाद बुद्ध पूर्णिमा के महासंयोग में लग रहा है. सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण भी हमारे जीवन पर बड़ा प्रभाव डालता है. लेकिन यह उपछाया ग्रहण है इसलिए इससे लोगों के मन या शरीर पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ने वाला है. यानी इस चंद्रग्रहण को लेकर गर्भवती स्त्रियों, छात्रों या किसी भी व्यक्ति को कोई विचार करने की जरूरत नहीं है. यह भारत में दिखाई भी नहीं देगा इसलिए इस दौरान किसी प्रकार के सूतक का भी विचार नहीं करना होगा. भारत के हिसाब से देखा जाए तो 5 मई की रात्रि को 8:44 मिनट से रात करीब एक बजे तक रहेगी इसलिए इसमें मंदिरों या पूजा पाठ में किसी तरह के नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं है.
पृथ्वी जब सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है तो चंद्र ग्रहण होता है. आसान भाषा में समझें तो पृथ्वी परिक्रमण और परिभ्रमण करती है. परिक्रमण का मतलब पृथ्वी का सूर्य की परिक्रमा करना और परिभ्रमण का मतलब उसका अपनी ही धुरी पर घूमना. सूर्य की परिक्रमा के दौरान जब पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में आ जाती है तब चंद्रग्रहण लगता है.
चंद्र ग्रहण की शुरुआत आठ बजकर 44 मिनट से हो जाएगी, यह रात में 10 बजकर 52 मिनट पर अपने पीक पर होगा. इसके बाद इसका प्रभाव घटने लगेगा. वहीं, यह 06 मई को रात एक बजकर दो मिनट पर खत्म हो जाएगा.
यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं लगेगा, इसलिए भारतीयों को इससे डरने या घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि कई ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि पश्चिमी देशों पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव पड़ सकता है. इससे वहां कई देशों में प्राकृतिक आपदाएं बढ़ने की भी आशंका है.
साल का पहला चंद्र ग्रहण यूरोप, एशिया के अधिकांश हिस्से, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, प्रशांत, अटलांटिक, अंटार्कटिका और हिंद महासागर में दिखाई देगा. जहां तक भारत में इस चंद्र ग्रहण के दिखाई देने की बात है तो खगोल शास्त्रियों और हिंदू पंचांग की गणनाओं के आधार पर यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा.
यह कोई विशिष्ट चंद्र ग्रहण नहीं है बल्कि एक उपछाया चंद्र ग्रहण है. पूर्ण चंद्रग्रहण और आंशिक चंद्रग्रहण के बीच की एक स्थिति होती है और उसे ही उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं. उपछाया चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया के बाहरी क्षेत्र से गुजरता है जिसे पेनम्ब्रा कहा जाता है. यानी पृथ्वी पर चंद्रमा की छाया न पड़कर सिर्फ उपछाया ही पड़ती है.
पेनम्ब्रा एक ऐसा क्षेत्र है जहां पृथ्वी सूर्य की डिस्क के हिस्से को ढकती हुई प्रतीत होती है लेकिन पूरी नहीं. इसका मतलब यह है कि जब चंद्रमा पेनम्ब्रा के भीतर होता है तो उसे सूर्य से कम रोशनी मिलती है और वह मंद हो जाता है लेकिन फिर भी कुछ हद तक रोशन रहता है. उपछाया चंद्र ग्रहण नग्न आंखों से देखना संभव नहीं होता है. यह दूरबीन आदि की मदद से देखा जा सकता है. उपछाया या पेनुम्ब्रल चंद्र ग्रहण में चांद के आकार में कोई परिवर्तन नहीं होता है. इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से आम दिनों की तरह ही दिखाई देता है.
ज्योतिषविदों का कहना है कि चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है. सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं और देवी-देवताओं की पूजा वर्जित होती है. हालांकि 5 मई को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. आप बिना किसी संकोच के पूजा-पाठ कर सकते हैं. साथ ही भोजन, विश्राम या दैनिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा. गर्भवती महिलाओं को भी किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.