सीबीआई ने सरकारी बैंक देना बैंक में बड़े पैमाने पर घोटाले का पता लगाया है. वहां के एक ब्रांच मैनेजर ने एक आदमी के साथ मिलकर जाली दस्तावेज बनाए और उसके बाद सात प्राइवेट कंपनियों की ओर से बैंक लोन लेना शुरू कर दिया. इन प्राइवेट कंपनियों का बैंक में खाता है.
सीबीआई के मुताबिक मुंबई के शोमैन ग्रुप के वमिल बारोट ने वहां के मालाबार हिल्स ब्रांच के मैनेजर प्रीतम विद्याधर नाहरकर और सात अन्य के साथ मिलकर 220 करोड़ रुपये की हेराफेरी की.
बताया जाता है कि बारोट ने अपने आप को बैंक के प्रतिनिधि के रूप में कॉर्पोरेट ग्रुप के सामने पेश किया. लेकिन जब वह बैंक आता था तो वह अपने को ग्रुप के सलाहकार के रूप में बताता था. इस तरह से उसने सब का विश्वास जीत लिया. उसके बाद उसने देना बैंक में इन कॉर्पोरेट ग्रुप के 256.49 करोड़ रुपये के एफडी को अपना बता दिया और उनके आधार पर उसने ब्रांच मैनेजर के साथ मिलकर बैंक से 220 करोड़ रुपये की हेराफेरी की और इन पैसों को उसने हथिया लिया.
सीबीआई ने जांच के दौरान मुबंई में अभियुक्त के घर और दफ्तर में छापेमारी की. वहां से उन्हें महत्वपूर्ण सुराग मिले.