scorecardresearch
 

EXCLUSIVE: पीएम आवास योजना को पलीता लगा रहे हैं भ्रष्ट बिल्डर और बाबू

प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर बड़ी धांधली का खुलासा हुआ है. एक ऐसे गिरोह का पर्दफाश हुआ जो फर्जीवाड़ा कर पीएम आवास योजना के तहत लाभ दिलाने का झांसा दे रहा था.

Advertisement
X
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो- Getty Images)
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो- Getty Images)

मकान खरीदने की ख्वाहिश रखने वाले सावधान! शातिर बिल्डर आपको प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सब्सिडी वाले होम लोन का लालच देकर अवैध अपार्टमेंट के जाल में फंसा सकते हैं.

इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम की जांच से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)  में ऐसा गिरोह बेनकाब हुआ है जो फर्जीवाड़ा कर पीएम की फ्लैगशिप आवास योजना के तहत लाभ दिलाने का झांसा दे रहा था.  

बता दें कि इस गिरोह ने ग्रेटर नोएडा के आसपास के इलाकों में अपना जाल बिछा रखा था. दुर्भाग्य से पिछले दिनों इसी इलाके में दो इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं.  

इंडिया टुडे के अंडरकवर रिपोर्टर्स ने शाहबेरी गांव में अपनी जांच से पता लगाया कि किस तरह स्थानीय बिल्डर रिहाइशी संपत्तियों में अवैध तरीके से पांचवें और छठे फ्लोर का निर्माण जारी रखे हुए हैं. इसी साल जुलाई में दो इमारतों के गिरने का भी इन बिल्डर पर कोई असर नहीं हुआ है. शाहबेरी गांव दिल्ली से एक घंटे से भी कम ड्राइव की दूरी पर है.

Advertisement

बदतर बात है कि ये बिल्डर अवैध निर्माणों पर भी पीएम आवास योजना का लोन दिलवाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश कर रहे हैं.

इंडिया टुडे के अंडरकवर रिपोर्टर्स ने शाहबेरी गांव में ‘गुडविल रीयल एस्टेट’  का रुख किया, जिसका संचालन चांद और उसके पिता शमीम करते हैं. अंडरकवर रिपोर्टर ने काल्पनिक मकान खरीदार बनकर उनके बनाए अवैध फ्लोर को खरीदने की इच्छा जताई. शमीम ने बिना किसी लागलपेट कहा, ‘आपको सच बताऊं तो हम पहले ही अतिरिक्त निर्माण खड़े कर चुके हैं.’

रिपोर्टर- ‘तो आप अतिरिक्त फ्लोर बना चुके हैं?’

शमीम- ‘उसमें कोई दिक्कत नहीं है. जो भी हम बेचेंगे हम उसको लेकर पारदर्शी रहेंगे. ऐसी हर इमारत के नीचे मेरा अपना दफ्तर है.’

रिपोर्टर- ‘लेकिन तुम्हारा खुद का ही कहना है कि पांचवें और छठे फ्लोर अवैध हैं, अगर उन्हें गिराया गया तो फिर क्या होगा?’

शमीम- ‘उसके लिए हम हैं यहां, सर.’

शमीम ने किसी भी संभावित सरकारी कार्रवाई से पूरी सुरक्षा की गारंटी दी. शमीम ने साथ ही आवास योजना के तहत सब्सिडीकृत कर्ज़ दिलवाने में भी पूरी मदद का वादा किया.

शमीम- ‘आपको ढाई लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी (योजना के तहत). क्या आप प्रधानमंत्री आवास योजना चाहते हैं. हम आपको वो दिलवाएंगे.’

शमीम ने दावा किया कि उसने अपने सभी ग्राहकों को आवास योजना कर्ज दिलाने के लिए मध्यस्थता की.

Advertisement

शमीम ने कहा, ‘हम अपने सभी ग्राहकों को इसके (आवास योजना कर्ज) बारे में बताते हैं. लेकिन कुछ के पास कागज़ात नहीं होते. हमारा अपना आदमी है (लोन एजेंसी में). हम अपने ग्राहक को उससे अपने भाई के तौर पर मिलाते हैं और उसी को फार्म भरने के लिए कहते हैं. अगर आपको योजना (सब्सिडी) मिलती है तो इसे खरीदिए, वरना छोड़ दीजिएगा. ठीक है.’

अंडरकवर रिपोर्टर- ‘अगर हम पीएम आवास योजना के तहत फ्लैट खरीदते हैं तो क्या उसे बाद में बेच सकते हैं.’

शमीम- ‘हां, बिल्कुल आप ऐसा कर सकते हैं. जो भी इसे खरीदेगा उसे ये (सब्सिडीकृत कर्ज) मिलेगा.’

बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकार का इरादा देहाती क्षेत्रों में 3 करोड़ और शहरी क्षेत्रों में 1 करोड़ आवास बनाने का है. सरकार का मिशन ‘2022 तक सभी के लिए आवास’ का है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल जून में प्रोजेक्ट के तहत वित्तीय सहायता बढ़ाने का एलान करते हुए कहा था- ‘पहले पीएम आवास योजना के तहत देहाती क्षेत्रों में मकान बनाने के लिए 70,000 रुपये से 75,000 रुपये तक की सहायता दी जाती थी. इसे  हमने बढ़ाकर सवा लाख रुपये कर दिया है. अब मनरेगा (MNREGA) के तहत 90-95 दिन के श्रम खर्च पर लगने वाला पैसा भी लाभार्थी के खाते में सीधा जमा होगा.’  

Advertisement

आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में विभिन्न आय वर्गों के वैध लाभार्थियों को ब्याज सब्सिडी दी जाती है. हालांकि जिन परिवारों के पास पहले से पक्का मकान मौजूद है उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलता.  

लेकिन इंडिया टुडे की जांच से सामने आया कि कुछ हाउसिंग लोन एजेंसियां अवैध तौर पर बने अपार्टमेंटों के खरीदारों को लाभ दिलाने के लिए सामान्य नियम-कायदों से भी छेड़छाड़ कर रहे हैं.

आधार हाउसिंग फाइनेंस में प्रतिनिधि निकेतन कुमार ने शाहबेरी के अवैध मकानों के लिए पीएम आवास योजना का कर्ज दिलाने के लिए हामी भरने में पलक झपकने की भी देर नहीं लगाई.

रिपोर्टर ने कहा, ‘ये बालाजी एन्क्लेव के पीछे शाहबेरी की चार-पांच इमारतों में से एक है.’

कुमार- इसके लिए 10.45% (ब्याज की दर) है. इस पर आपको 2.67 लाख रुपए की सब्सिडी मिलेगी.

रिपोर्टर- ‘पीएम आवास योजना के तहत ना? क्या वो दिला देंगे?’

कुमार- ‘हां, मैं दिला दूंगा. आपको आपका लोन और सब्सिडी मिल जाएगी. छह महीने के बाद आप इसे (लोन को) किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक को ट्रांसफर कर सकते हैं. उसमें कोई दिक्कत नहीं होगी. वो आपके लोन के साथ एडजस्ट हो जाएगा.’

उत्तर प्रदेश के गोंडा में इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम की जांच में कुछ अलग ही स्थिति सामने आई. यहां मुख्य तौर पर ग्रामीण प्रधान जिलों में कच्चे मकानों में रहने वाले लोग हताश हैं क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकारी सब्सिडी हासिल करने के लिए दिए गए उनके आवेदन रद्द कर दिए गए हैं.   

Advertisement

गोंडा के झांझरी ब्लॉक के तहत पंडितपुर गांव की भूपा देवी और मायादेवी ने इंडिया टुडे को बताया कि वो स्थानीय अधिकारियों को घूस देने की स्थिति में नहीं थीं इसीलिए आवास योजना के तहत सरकारी सहायता को हासिल करने में नाकाम रहीं.  दूसरे गांवों में भी झुग्गियों में रहने वाले ग्रामीणों ने भी ऐसी ही व्यथा सुनाई.

गोंडा के मुख्य विकास अधिकारी अशोक कुमार ने कबूल किया कि जिले में 2017-18 में पीएम आवास योजना के तहत आवेदकों में से 2,032 को फर्जी पाया गया. इनमें से 1,432 ने सरकारी सहायता लौटा दी है. मुख्य विकास अधिकारी ने इंडिया टुडे को बताया, ‘स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है. साथ ही गलत तरीके से लाभ उठाने वाले 56 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.’  

गलत तरीके से लाभ उठाने वाले कुछ लाभार्थियों से गोंडा में इंडिया टुडे स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने बात की तो उन्होंने बताया कि फर्जी तरीके से सरकारी सहायता लेना उनके लिए कितना आसान था. ऐसे ही एक शख्स माशूक अली ने बताया कि किस तरह अपना पक्का मकान होते हुए भी योजना का लाभ उठाया जबकि ये योजना सिर्फ जर्जर कच्चे मकानों में रहने वालों के लिए ही थी.

माशूक अली ने कहा, ‘मैंने डर के मारे पीएम आवास योजना के तहत मिली वित्तीय मदद लौटा दी. मेरा पहले से ही पक्का आवास है. मेरे बुजुर्ग माता-पिता और मैं जेल नहीं जाना चाहते.’

Advertisement

ऐसे ही एक और बुजुर्ग शख्स चेला राम ने भी जो सरकारी मदद हासिल की थी वो जांच के डर से लौटा दी. चेला राम ने बताया- ‘मैंने जब पीएम आवास योनजा के लिए सरकारी सहायता हासिल करने का आवेदन किया तो मेरा पहले से ही पक्का मकान मौजूद था. मुझे 40,000 रुपये मिले जिसे मैंने लौटा दिया. मुझे डर लगा. मैं जेल नहीं जाना चाहता था.’

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अनियमितताओं के लिए राज्य की पूर्ववर्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया है.

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान आवास योजना के तहत गलत तरीके से सहायता बांटने के लिए समाजवादी पार्टी की सरकार को जिम्मेदार ठहराया.

दिनेश शर्मा के मुताबिक 86,000 आवास योजना के आवेदन अयोग्य पाए गए. शर्मा ने बताया कि योगी सरकार ने फर्जी तरीके से लाभ हासिल करने वाले लोगों के खिलाफ अभियान छेड़ा है.

Advertisement
Advertisement