कोलकाता के जादवपुर यूनिवर्सिटी में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो से बदसलूकी को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है. मालूम हो कि जादवपुर यूनिवर्सिटी में गुरुवार (19 सितंबर) को केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो एबीवीपी के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे. जहां छात्रों ने उनके साथ बदसलूकी की और कई घंटे तक घेर रखा. इसके बाद राज्य के राज्यपाल जगदीप धनखड़ यूनिवर्सिटी के कैंपस में पहुंचे और केंद्रिय मंत्री को छात्रों के घेराव से बाहर निकाला.
इसके लेकर पश्चिम बंगाल में सत्तारुढ़ टीएमसी ने बयान जारी कर राज्यपाल के यूनिवर्सिटी में जाकर केंद्रीय मंत्री व बीजेपी नेता को बचाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. वहीं, टीएमसी महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि राज्यपाल राज्य सरकार को बिना बताए वहां गए और उन्होंने रास्ते में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फोन किया, तो मुख्यमंत्री ने उन्हें वहां नहीं जाने की सलाह दी थी, लेकिन वे फिर भी वहां चले गए.
पार्थ चटर्जी के इस बयान पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने नाराजगी जताई है. विजयवर्गीय ने कहा कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ के प्रति टीएमसी नेता पार्थ चटर्जी का यह बयान असम्मान दर्शाता है कि राज्यपाल को जादवपुर विश्वविद्यालय नहीं जाना था!
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री जगदीप धनखड़ जी के प्रति #TMC नेता पार्थ चटर्जी का यह बयान असम्मान दर्शाता है कि राज्यपाल को जादवपुर विवि नहीं जाना था! जबकि, सच्चाई ये है कि यदि राज्यपाल समय पर वहाँ नहीं जाते, तो सांसद श्री बाबुल सुप्रियो जी के साथ कोई भी अनचाही घटना घट सकती थी!
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) September 21, 2019
वहीं, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने जादवपुर यूनिवर्सिटी में जाने के अपने फैसले को सही बताया है. उनका मानना है कि उन्होंने जो भी किया संविधान के दायरे में किया.
एक प्रेस रिलीज जारी कर राज्यपाल ने कहा कि वे मुख्यमंत्री बीजेपी और चीफ सेक्रेट्री से बात करने के बाद ही जाधवपुर यूनिवर्सिटी गए, जबकि टीएमसी की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया था कि गवर्नर ने पुलिस और प्रशासन को बिना बताए यह काम किया है.