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बिहार ट्रेजरी घोटाला: विवाद से जुड़े सवाल

क्या है मामला? सीएजी ने पाया कि बिहार सरकार ने राजकोष से 1 अप्रैल, 2002 से 31 मार्च, 2008 के बीच एसी बिलों पर किए गए 11,412 करोड़ रु. के भुगतान के डीसी बिल भेजे ही नहीं.

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क्या है मामला?

सीएजी ने पाया कि बिहार सरकार ने राजकोष से 1 अप्रैल, 2002 से 31 मार्च, 2008 के बीच एसी बिलों पर किए गए 11,412 करोड़ रु. के भुगतान के डीसी बिल भेजे ही नहीं.

क्या हैं एसी और डीसी बिल?

सरकारी विभाग किसी भी खर्च का अनुमान तैयार करते हैं और सरकारी खजाने से पैसा निकालने के लिए बिल तैयार करते हैं. यह एसी बिल है. फंड निकाले जाने के बाद, विभागों को खर्च का विस्तृत ब्यौरा देने वाले बिल तैयार करने होते हैं और साथ ही वाउचर देना होता है. यह डीसी बिल है जिसे सीएजी के पास जमा कराना जरूरी है.

सीएजी ने कब दिए बिहार सरकार को संकेत?

पहली बार 2006 की अपनी रिपोर्ट में जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे. सीएजी ने 2007 और 2008 की अपनी रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख किया था.

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कैसे पटना हाइकोर्ट ने रखा मामले में कदम?

एक अधिवक्ता ने अनियमितता को लेकर जनहित याचिका दायर की. इसमें आरोप लगाया गया कि सरकार ने डीसी बिल जमा नहीं कराए इसलिए धन का सदुपयोग नहीं हुआ है. कोर्ट ने सीबीआइ जांच के आदेश दिए.

क्या है सरकार का रुख?

सरकार का दावा, यह मामला एकाउंटिंग का है, इसलिए इसे विधानसभा की लोक लेखा समिति को भेज दिया गया है. सरकार कहती है, पीएसी इसकी जांच कर रही है, मामला सीबीआइ को नहीं सौपा जाना चाहिए.

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