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केंद्र के नए MSP को भाकियू ने किया खारिज, कहा-1 क्विंटल धान पर 715 रुपये का नुकसान

भारतीय किसान यूनियन ने आंकड़ों के आधार पर कहा कि सरकार द्वारा धान के समर्थन मूल्य में वर्ष 2016-17 में 4.3 प्रतिशत, 2017-18 में 5.4 प्रतिशत, 2018-19 में 12.9 प्रतिशत और 2019-20 में 3.71 प्रतिशत वृद्धि की गई थी. वर्तमान सीजन 2020-21 में यह पिछले पांच वर्षों की सबसे कम 2.92 प्रतिशत वृद्धि है.

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केंद्र ने धान के समर्थन मूल्य में इजाफा किया है (फोटो- पीटीआई)
केंद्र ने धान के समर्थन मूल्य में इजाफा किया है (फोटो- पीटीआई)

  • नये समर्थन मूल्य को भाकियू ने बताया धोखा
  • 5 सालों में सरकार ने सबसे कम इजाफा किया
  • 100 किलो मक्का पर 580 रुपये का नुकसान
भारतीय किसान यूनियन ने कहा है कि सीजन 2020-21 की खरीफ फसलों लिए घोषित समर्थन मूल्य किसानों के साथ धोखा है. भारतीय किसान यूनियन ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पिछले पांच साल में सबसे कम है.

संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने सीजन 2020-21 के लिए निर्धारित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को किसानों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि एक बार फिर से केंद्र सरकार ने महामारी के समय आजीविका के संकट से जूझ रहे किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है. उन्होंने कहा कि यह देश के भंडार भरने वाले और खाद्य सुरक्षा की मजबूत दीवार खड़ी करने वाले किसानों के साथ धोखा है.

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पांच सालों में सबसे कम बढ़ोतरी

भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि यह वृद्धि पिछले पांच वर्षों में सबसे कम है. उन्होंने कहा कि किसानों को कुल लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर बनने वाले मूल्य के अलावा कोई दूसरी कीमत मंजूर नहीं है. सरकार महंगाई दर नियंत्रित करने के लिए देश के किसानों की बलि चढ़ा रही है.

धान पर 715 रुपये का घाटा

किसान यूनियन ने आंकड़ों के आधार पर कहा कि सरकार द्वारा धान के समर्थन मूल्य में वर्ष 2016-17 में 4.3 प्रतिशत, 2017-18 में 5.4 प्रतिशत, 2018-19 में 12.9 प्रतिशत और 2019-20 में 3.71 प्रतिशत वृद्धि की गई थी. वर्तमान सीजन 2020-21 में यह पिछले पांच वर्षों की सबसे कम 2.92 प्रतिशत वृद्धि है. उन्होंने कहा कि सरकार की इस घोषणा से किसानों के प्रत्येक क्विटंल पर 715 रुपये का नुकसान हो रहा है.

किसानों को हो रहा है नुकसान

भाकियू का दावा है कि ऐसे ही एक क्विंटल ज्वार पर 631 रुपये, बाजरा में 934 रुपये, मक्का में 580 रुपये, अरहर दाल में 3603 रुपये, मूंग में 3247 रुपये, उड़द में 3237 रुपये, चना में 3178 रुपये, सोयाबीन में 2433 रुपये, सूरजमुखी में 1985 रुपये, कपास में 1680 रुपये और तिल में 5365 रुपये का नुकसान किसानों को होने वाला है.

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भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से पूछा कि आखिर कीमतें निर्धारित करने के लिए सरकार ने कौन सा फॉर्मूला अपनाया है. भाकियू ने मांग किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी कानून का दर्जा दिया जाए.

केंद्र ने की है नये समर्थन मूल्य की घोषणा

केंद्र सरकार ने सोमवार को वर्ष 2020-21के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 53 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 1,868 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया. इसके साथ ही तिलहन, दलहन और ज्वार की भी एमएसपी बढ़ाई गई है.

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