कराची के प्रसिद्ध पंचमुखी हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी रामनाथ मिश्र महराज के नेतृत्व में गुरुवार की शाम एक दल पाकिस्तान से 160 हिंदुओं की अस्थियां लेकर वाघा बॉर्डर पहुंचा. मुख्य पुजारी को पहले इन अस्थियों को लेकर दिल्ली आना था, लेकिन वीजा नहीं मिल पाने के कारण वह अस्थियों को दिल्ली के श्री देवोत्थान सेवा समिति के सदस्य विजय शर्मा और उनके 20 सदस्यीय दल को सौंपकर हरिद्वार के लिए रवाना हो गए.
अब श्री देवोत्थान सेवा समिति के लोग अस्थियां लेकर दिल्ली आ रहे हैं. यहां लगभग एक हफ्ते पितृपक्ष का पूजा पाठ करने के बाद और भी जगहों से आए हुए अस्थियों को एकत्र करके 23 सितंबर को अस्थि कलश यात्रा लेकर हरिद्वार के लिए रवाना होंगे.
हरिद्वार और कोलकाता का मिला वीजा
गौरतलब है कि पंचमुखी हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी रामनाथ मिश्र महराज, शिष्य कबीर और उनके परिवार के लोग 160 हिन्दू लोगों की अस्थियों को पहले दिल्ली लाकर, पूजा-पाठ कर अस्थियों को विसर्जन करने अस्थि कलश यात्रा के साथ हरिद्वार जाना चाहते थे. लेकिन उनमें से सिर्फ पुजारी रामनाथ मिश्र महराज और उनके शिष्य कबीर को हरिद्वार और कोलकाता का वीजा मिल पाया है.
दोबारा लगाएंगे वीजा के लिए गुहार
दिल्ली की गैर सरकारी संगठन श्री देवोत्थान सेवा समिति के सदस्य विजय शर्मा ने वाघा बॉर्डर से दिल्ली आते वक्त बताया, 'रामनाथ मिश्र महराज और उनके शिष्य को दिल्ली का वीजा नहीं मिल पाया और इसलिए हमने महराजजी को अपने लोगों के साथ हरिद्वार के लिए रवाना कर दिया है. अब हमलोग अस्थियों को लेकर दिल्ली आ रहे हैं. गुरुवार को हमलोग दुबारा रामनाथ मिश्र महराज और उनके शिष्य कबीर के दिल्ली के वीजा के लिए दुबारा भारत सरकार से गुहार लगाएंगे.'
कराची शमशान में रखी थीं अस्थियां
पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू आमतौर पर अपनी आस्था के अनुसार सिंधु नदी में अस्थि विसर्जन कर देते हैं. लेकिन ये अस्थियां ऐसे लोगों की हैं, जिनके परिजन हरिद्वार में ही उनका अस्थि विसर्जन संस्कार करना चाहते थे. अब तक ये अस्थियां कराची के शमशान घाट में सुरक्षित रखी हुई थीं.
पुरोहित को बताएंगे नाम और गोत्र
महंत रामनाथ ने बताया कि जिन लोगों की ये अस्थियां हैं, उनके घरवालों ने उन्हें गोत्र और हरिद्वार में कुल पुरोहित का नाम बताया है. इसी के आधार पर हरिद्वार में पूरी धार्मिक मर्यादाओं के साथ इन अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा. साथ ही हरिद्वार में पुरोहितों के पास रखे रजिस्टर में उनका नाम भी दर्ज कराएंगे.
पाकिस्तान में जिन हिंदुओं को वीजा नहीं मिल सका, वो अस्थियों को अंतिम विदाई देने के लिए कराची से पहले लाहौर और फिर वाघा बार्डर तक पहुंचे थे. रामनाथ महाराज ने बताया कि बीते 2 से 10 साल की इन अस्थियों को विभिन्न श्मशान घाटों से इकट्ठा कर कराची के गुज्जर बरियन मंदिर और पंचमुखी हनुमान मंदिर लाया गया. वहीं से इन्हें मंहत रामनाथ महाराज भारत लेकर आए.
40 और अस्थियां हैं कराची के शमशान में
महंत रामनाथ के मुताबिक अभी भी 40 हिंदुओं की अस्थियां पाकिस्तान के श्मशान घाटों में पड़ी हैं. अमृतसर की संस्था फोकलोर एकडेमी बीते कई साल से पाकिस्तान से हिंदुओं की अस्थियों को भारत लाकर हरिद्वार में विसर्जित कराने में मदद कर रही है. इस संस्था से जुड़े रमेश यादव ने अटारी सीमा पर महंत रामनाथ का स्वागत करने के साथ अस्थियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए.