आदरणीय,
भगवा ब्रिगेड के कर्ताधर्ता
जिस वक्त देश में जाति, आरक्षण और महंगाई जैसे तमाम मुद्दों पर विपक्ष और जनता सरकार के 'कान खा रही' थी, ठीक उसी वक्त चुनावी बयार में बहते हुए धर्म के आधार पर जनसंख्या का आंकड़ा सामने आ गया. मुस्लिमों की आबादी में 'क्रांतिकारी बढ़त' से देश की मौजूदा सरकार में अपने दखल का दावा करने वाली भगवा ब्रिगेड के तमाम कर्ताधर्ता मुसीबत में है. मैं इस 'दुख की घड़ी' में आपके साथ हूं और आपकी इस मुसीबत को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग करता हूं.
धर्म के आधार पर आबादी का जो है उससे आपका परेशान होना लाजिमी है. आखिरकार बीते एक साल से आप 10-10 बच्चे पैदा करने की सलाह देते रहे, लेकिन किसी ने आपकी सुनी नहीं. शायद अच्छे दिन और 15 लाख वाले तकिया-कलाम की तरह इसे भी चुनावी जुमला समझ लिया गया होगा, आखिरकार आप खुद को सरकार का एजेंट तो बताते ही हैं, इसलिए जनता को गलतफहमी होना लाजिमी है.
मजेदार बात ये है कि आप जिन्हें गैर समझकर दुत्कारते रहे उन्होंने आपके 'तथाकथित अपनों' से बढ़कर आपकी बात मानी और आबादी में 24 फीसदी का इजाफा करके आपके वचनों की लाज रख ली. (क्योंकि आपके मुताबिक हैं तो सभी हिंदू की संतान). इस पावन अवसर पर आपको तो खुश होना चाहिए, क्योंकि आप जिसे विरोधी समझ रहे थे वह तो आपकी ही बात पर अमल कर रहा है. यानी, भेदिए तो आपके घर में छुपे हैं, जो खुद नसबंदी कराकर या शादी न करके, दूसरों को 10-10 बच्चे पैदा करने की सलाह देते हैं. ऐसे लोगों की बात भला कौन सुनेगा जो देश की आबादी बढ़ाने में अपना योगदान नहीं दे सके. चाहे वह साधु हों या फिर साध्वी. और मंच पर चढ़ कर बच्चे पैदा करने का ज्ञान बांटते हैं. अब आप ही बताइए, आखिरकार इस देश में कौन मानता है? अगर आप वाकई धर्म रक्षा करना चाहते हैं तो 'वक्त का इशारा' समझिए.
कभी-कभी मुझे आपकी नीयत में भी खोट नजर आता है. आप खुद घूम-घूम कर हिंदुओं से 5 बच्चे, 10 बच्चे पैदा करने की अपील करते हैं, तो वहीं, दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर मुस्लिमों को सजा देने की भी बात करते हैं. उन पर आपराधिक मुकदमा चलाने की बात करते हैं, उनका राशन कार्ड और नौकरी छीनने का भी दम आप जोश से भरते हैं, लेकिन 8 बच्चे पैदा करने वाले हिंदू के आप चरण धोकर पी जाएंगे? और जब कुछ सालों बाद वह भुखमरी के कगार पर बैठा अपनी किस्मत को कोस रहा होगा तो शायद ही आप उसके आस-पास फटकें.
देश को अलग-अलग धड़ों में बांटने की सियासत करके आप सिर्फ इसे गर्त में ले जाएंगे. 'विश्व कल्याण' और 'वसुधैव कुटुंबकम' टाइप आपके जो पुरातन से चले आ रहे 'हैशटैग' हैं वो ट्रेंड होने के बजाय खो रहे हैं. इसलिए नीति और नीयत दोनों सुधारिए, आपके साथ देश का भी भला होगा.
सादर
एक 'दुखी आत्मा'