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...तो महज एक कटहल में ही डोल गया यूपी पुलिस का ईमान!

उत्तर प्रदेश की पुलिस की 'महिमा' अपरम्पार है. नए-नए कारनामों को लेकर प्रदेश की खाकी चर्चा में बनी रहती है. इस बार मामला एक ऐसे नजराने का है, जिसे सुनकर किसी का सिर शर्म से झुक जाए.

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उत्तर प्रदेश की पुलिस की 'महिमा' अपरम्पार है. नए-नए कारनामों को लेकर प्रदेश की खाकी चर्चा में बनी रहती है. इस बार मामला एक ऐसे नजराने का है, जिसे सुनकर किसी का सिर शर्म से झुक जाए.

जी हां, आरोप है कि बस्ती की एक महिला दारोगा केस की जांच करने पहुंचीं और उन्होंने रिश्वत में एक कटहल लेकर केस रफा-दफा कर दिया. मामला कप्तानगंज थाना क्षेत्र के माझा गांव का है, जहां के रहने वाले बलिराम पर आरोप है कि वह अपनी बहू की विदाई नहीं कर रहा. पीड़ि‍त विवाहिता की मां की शिकायत पर महिला थाने में मुकदमा दर्ज हुआ. इसके बाद महिला थाने की थानेदार सुमन सिंह जांच करने के लिए आरोपी बलिराम के घर पहुंचीं.

बलिराम ने घर पर कटहल के दो पेड़ लगाए थे, जिस पर दर्जनों बड़े-बड़े कटहल फले हुए थे. इन पेड़ों पर दारोगा साहिबा की नजर पड़ गई. आरोप है कि जांच करने के बदले दारोगा जी ने एक कटहल की मांग कर दी. बलिराम और उसके परिजनों ने महिला एसओ को एक कटहल और कुछ 'नजराना' सौंप दिया. इतना मिलते ही महिला दारोगा ने केस को ही झूठा करार देते हुए इसे खत्म कर दिया.

केस रफा-दफा होने के बाद विवाहिता की मां अब एसपी कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हो गई है. अपनी बेटी को अपने ही घर लाने के लिए जद्दोजहद कर रही उर्मिला देवी का अब पुलिस पर से विश्वास खत्म हो गया है. उर्मिला का आरोप है कि उसकी बेटी को ससुराल वालों ने जबरन घर में 'नजरबंद' कर रखा है. जब भी वह अपनी बेटी की विदाई के लिए ससुराल जाती हैं, तो उनके साथ मारपीट की जाती है.

थक-हारकर जब उन्होंने पुलिस का सहारा लिया, तो पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज किया, मगर वह भी मात्र एक कटहल में 'बिक' गई. आज तक पुलिस न उसकी बेटी की विदाई करा पाई, न ही मुकदमा दर्ज होने के बाद कोई कार्रवाई ही की. ऐसे में अब उन्हें पुलिस से उम्मीद नहीं है.

हालांकि महिला एसओ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. बहरहाल, पूरी सच्चाई का खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा.

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