गर्मी का जोर बढ़ने के साथ भू-जल स्तर लगातार गिरने के कारण मध्यप्रदेश के इंदौर जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है. जिला प्रशासन ने यह कदम गर्मियों के दौरान खासकर पीने के पानी की उपलब्धता को बरकरार रखने के मकसद से उठाया है.
अधिकारियों ने पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत जारी प्रशासनिक आदेश के हवाले से बताया कि जिले भर में 31 जुलाई तक सरकारी इजाजत के बगैर नलकूप नहीं खोदे जा सकेंगे. इसके साथ ही, नदी, बांध, तालाब और बावड़ी जैसे स्त्रोतों के पानी के सिंचाई और उद्योग-धंधों में इस्तेमाल पर भी अस्थायी रोक लगा दी गयी है.
अधिकारियों के मुताबिक यह प्रतिबंध तोड़ने वाले को दो साल के कारावास अथवा दो हजार रुपये के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हैण्ड पम्पों का जलस्तर दिन-ब-दिन गिरता जा रहा है.
गर्मियां अभी शुरू ही हुई हैं. लेकिन हालत यह है कि जिले में एक हजार से ज्यादा हैण्ड पम्प पानी की कमी के कारण बंद हो गये हैं, जबकि कई अन्य जल्द ही बंद हो सकते हैं. नलकूपों का जलस्तर भी लगातार कम होता जा रहा है.
अधिकारियों ने बताया कि निजी स्तर पर नलकूपों की गहरी खुदाई और इनके बेतहाशा दोहन से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सरकारी जलस्त्रोत प्रभावित हो रहे हैं. वहीं सतही जलस्त्रोतों से अंधाधुंध सिंचाई के कारण भी नलकूपों में पानी का स्तर नीचे गिरता जा रहा है.