बॉलीवुड की फिल्म ‘तारें जमीं पर’ के गीत की उन पंक्तियों को याद कीजिए, ‘मेरी नजर ढूंढे तुझे, सोचूं यहीं तू आके थामेगी मां’. फिल्म का नन्हा किरदार इशान अवस्थी आंखों में आंसू लिए होस्टल में अपनी मां को याद करता है.
अब एक नये अध्ययन ने भी इस बात को साबित कर दिया है कि घर से दूर विश्वविद्यालय में पढने वाले लड़कों को लड़कियों की तुलना में अपनी मां की कमी ज्यादा खलती हैं.
ब्रिटेन में इस अध्ययन के बाबत एक सर्वेक्षण कराया गया जिसमें पाया गया कि जहां ज्यादातर लड़कियां नई मिली आजादी का आनंद लेती हैं , वहीं, बेटे अपने घर की कमी को महसूस करते हैं.
यह सर्वेक्षण शायर मुनव्वर राना की उन पंक्तियों को सच ठहराते हैं जिनमें एक बेटा कहता है, ‘घर की दहलीज पर रोशन हैं वो बुझती आंखे, मुझको मत रोको मुझे घर लौट के जाना है.’ सर्वेक्षण में एक तिहाई लड़कों ने कहा कि घर में बना अच्छा भोजन करने के लिए वे वापस जाना पसंद करेंगे जबकि लड़कियों के अपने पहले दो हफ्तों में घर वापस जाने की संभावना ज्यादा होती है.
इस अध्ययन में हजार छात्रों की राय ली गई. इसे अंजाम देने वाले नेशनल एक्सप्रेस के कार्ली ओडॉनेल ने कहा, ‘विश्विविद्यालय में आजाद होना और नये दोस्त बनाना सभी को भाता है लेकिन हरेक को घर की सुविधाओं की याद सताती है.’