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गिलानी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं: मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि वह अपने पाकिस्तानी समकक्ष यूसुफ रजा गिलानी पर आंख मूंदकर विश्वास नहीं कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान के सशस्त्र बलों की भी सहमति है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि वह अपने पाकिस्तानी समकक्ष यूसुफ रजा गिलानी पर आंख मूंदकर विश्वास नहीं कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान के सशस्त्र बलों की भी सहमति है.

उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान की असैन्य सरकार के हाथ मजबूत करना चाहता है और गिलानी स्पष्ट रूप से समझ चुके हैं कि मुम्बई जैसा एक और हमला शांति प्रक्रिया के लिए बहुत बड़ा झटका होगा. गिलानी ने बृहस्पतिवार को माले में भेंट के दौरान गिलानी को अमनपंसद व्यक्ति कहा था.

सिंह ने मालदीव से लौटते समय विशेष विमान में संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत पाक शांति प्रक्रिया कई घटनाओं का शिकार रही है. उन्होंने कहा कि उनकी पाकिस्तान यात्रा केवल तभी होगी जब पाकिस्तान मुम्बई आतंकवादी हमले के आरोपियों के खिलाफ ठोस कदम उठाएगा.

सिंह ने कहा कि मैं इस मामले में विस्तार से नहीं जाना चाहूंगा लेकिन जब मैंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ बातचीत की कि पाकिस्तान के सशस्त्र बलों की (वार्ता प्रक्रिया) में सहमति है तब मैंने एक लंबे समय के बाद महसूस किया कि पाकिस्तान के सशस्त्र बल भी इस प्रक्रिया में साथ हैं.

उनसे जब पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार के इस दावे के बारे में पूछा गया था कि सेना की भारत के साथ शांति पहल में सहमति है लेकिन जब सिंह से पूछा गया कि उन्होंने किस बात को लेकर गिलानी को अमनपसंद व्यक्ति कहा, तब उन्होंने कहा कि वह उनसे चार पांच बार मिल चुके हैं और बार-बार दोनों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की है, चर्चा के दौरान उनके समकक्ष इस पर सहमत थे कि सभी समस्याओं का शांतिपूर्ण हल के अलावा और कोई रास्ता नहीं है तथा आतंकवाद से इस प्रक्रिया में मदद नहीं मिल रही है. उन्होंने कहा कि मैं विश्वास कर सकता हूं कि पाकिस्तान में एक लोकतांत्रिक सरकार है. हमें इस लोकतांत्रिक सरकार के हाथ मजबूत करने चाहिए.

सिंह ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार को सामान्य बनाने तथा आतंकवाद संबंधी मुद्दों पर आगे बढ़ने की अपनी इच्छा को लेकर मैं सोचता हूं कि गिलानी के रूप में पाकिस्तान के पास ऐसा प्रधानमंत्री है जो हमारे साथ काम करने को तैयार है. गिलानी पर विश्वास करने के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हिम किसी पर आंख मूंद कर विश्वास कर रहे हैं चाहे वह कितना ही समझदार व्यक्ति क्यों न हो. प्रधानमंत्री गिलानी और मैं संबंधों को सामान्य बनाने में विश्वास करते हैं.

उन्होंने कहा कि वह और गिलानी इस बात पर सहमत थे कि वार्ता का दूसरा दौर शुरू होना चाहिए और जिस तरह पाकिस्तान ने भारत को सर्वोच्च तरजीह वाले देश का दर्जा देकर अपने परिवर्तित दृष्टिकोण का परिचय दिया है और वह आतंकवाद सहित सभी मुद्दों पर बातचीत को इच्छुक है, ऐसे में व्यापार संबंध के विकास के लिए वार्ता का दूसरा दौर आवश्यक है. उन्होंने कहा कि अतएव, मैं इस उम्मीद के साथ लौटा हूं कि पाकिस्तान के साथ वार्ता का दूसरा दौर शीघ्र ही शुरू होगा लेकिन उस बातचीत का क्या परिणाम होगा, मैं फिलहाल नहीं कह सकता क्योंकि भारत-पाक संबंध घटनाओं से प्रभावित होते हैं.

सिंह ने कहा कि हम दोनों ने यह स्वीकार किया कि यदि मुम्बई हमले जैसी एक और कोई घटना हो गयी तो यह बहुत बड़ा झटका होगा. मैं सोचता हूं कि इस बात को प्रधानमंत्री गिलानी भी भलीभांति समझते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय जनता मुम्बई हमलों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई को लेकर संतुष्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि जब तक तक इस मुद्दे पर कोई प्रगति नहीं होती है, शांति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती है.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत में एक न्यायिक आयोग भेजने पर राजी है और उसकी यात्रा की रूपरेखा तैयार की जा रही है और उसके बाद मेरी उम्मीद है कि कुछ प्रगति होगी. उनके और गिलानी के नया अध्याय शुरू करने के बयान पर पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि नियंत्रण रेखा के पार विश्वास बहाली के अन्य उपायों के साथ ही व्यापार उदारीकरण एक बहुत बड़ा उत्साहवर्धक कदम हो सकता है और नियंत्रण रेखा के पार के लोगों के जीवन में सुधार आ सकता है.

सिंह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान मानता है कि आतंकवाद को सरकारी नीति बनाने को दुनिया में कोई स्वीकार नहीं करेगा और इससे किसी भी समस्या का हल नहीं होगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को बता दिया गया है कि उसे आतंकवाद से कड़ाई से निबटना होगा और मैं सोचता हूं कि यह एक अन्य क्षेत्र है जहां दोनों देश आगे बढ़ सकते हैं लेकिन उसी के साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रति भारत की पहल रही है, हम विश्वास करते हैं लेकिन पूरी जांच परख रखते हैं.

जब उनसे पूछा गया कि विश्वास और जांच परख की यह प्रक्रिया कितनी वास्तविक है, सिंह ने कहा कि जिस दिन भारत को इस बात का ठोस सबूत मिल जाएगा कि पाकिस्तान आतंकवादी कार्रवाइयों को शह देने में लगा है, वह बिल्कुल नकारात्मक संकेत भेजेगा. जब प्रधानमंत्री से पूछा गया कि क्या वह पाकिस्तान की यात्रा करने पर सहमत हो गए हैं, उन्होंने कहा कि जब कभी गिलानी उनसे मिलते हैं, वे उन्हें यात्रा पर आने का न्यौता देते है, लेकिन मैंने भी कहा है कि इस यात्रा के लिए सही वक्त तब आएगा जब पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाये जाएंगे. जब समय आएगा तब मैं यात्रा करूंगा.

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