राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने सोमवार को हरियाणा के हिसार जिले के मिर्चपुर गांव में 70 वर्षीय एक बुजुर्ग और शारीरिक रूप से अक्षम उनकी बेटी को जिंदा जलाने के मामले में दोषी करार दिए गए 15 लोगों में से तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई.
पिछले वर्ष एक दलित बस्ती पर हमला कर इस घटना को अंजाम दिया गया था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के अलावा अन्य पांच दोषियों को पांच साल की कैद तथा प्रत्येक के लिए 20,000 रुपये के अर्थिक दंड की घोषणा की.
अदालत ने उम्रकैद की सजा पाए तीनों दोषियों में से प्रत्येक पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. यह राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में दी जाएगी. न्यायाधीश लाउ ने अन्य सात दोषियों को एक वर्ष कैद में रखने का निर्देश दिया.
इस दौरान अदालत इन दोषियों के आचार-व्यवहार को परखेगी. इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए इस मामले को दिल्ली की एक अदालत में स्थनांतरित करने का निर्देश दिया था. ज्ञात हो कि पिछले वर्ष 21 अप्रैल को जाट समुदाय के लोगों ने दलितों के घरों पर हमला कर ताराचंद (70) और शारीरिक रूप से अक्षम उनकी 18 वर्षीय बेटी सुमन की हत्या कर दी थी.
इस मामले के सभी 15 आरोपी जाट समुदाय से आते हैं. अदालत ने सुनवाई के बाद इन्हें दोषी करार दिया था. अदालत इस मामले के 97 आरोपियों में से 82 को सबूत के अभाव में पहले ही बरी कर चुकी है. उल्लेखनीय है कि मिर्चपुर गांव के जाट और दलित समुदाय के बीच विवाद के बाद दलित बस्ती पर हमला किया गया था.