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पाकिस्तान ने दाऊद को शरण दी है: भारत

भारत ने इंटरपोल की बैठक में कहा कि मुंबई विस्फोटों के लगभग 20 साल बीतने के बाद भी पाकिस्तान लगातार भगोड़े दाऊद इब्राहिम को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करा रहा है. इन विस्फोटों में 257 लोगों की मौत हुई थी.

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सुशील कुमार शिंदे
सुशील कुमार शिंदे

भारत ने इंटरपोल की बैठक में कहा कि मुंबई विस्फोटों के लगभग 20 साल बीतने के बाद भी पाकिस्तान लगातार भगोड़े दाऊद इब्राहिम को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करा रहा है. इन विस्फोटों में 257 लोगों की मौत हुई थी.

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने इटली की राजधानी रोम में सोमवार को आयोजित इस बैठक में कहा कि मुंबई विस्फोटों के लगभग 20 साल बीतने के बाद भी पाकिस्तान लगातार भगोड़े दाऊद इब्राहिम को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करा रहा है. इन विस्फोटों में 257 लोगों की मौत हुई थी. उन्होंने दाऊद के खिलाफ इंटरपोल के लंबित रेड कॉर्नर नोटिस का भी जिक्र किया.

उन्होंने कहा, 'मैं एक अवस्था पर बंधा हुआ हूं क्योंकि नियमिति वार्ता एवं विश्वसनीय सबूतों को पेश करने के बावजूद पिछले सदी के जघन्य अपराध यानी की 1993 के मुंबई विस्फोटों के साजिशकर्ताओं में से एक को अभी भी पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह मिली हुई है उसे सजा देनी बाकी है.'

गृहमंत्री ने दाऊद की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सभी जानते हैं कि वे पड़ोसी देश में मौजूद है और इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेडकार्नर नोटिस भी जारी किया है. यह नोटिस 1993 से लंबित है.

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शिंदे ने कहा, 'भारत को कई स्तरों पर आतंकवादी खतरों, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद का सामना करना पड़ रहा है. आतंकवाद दक्षिण एशिया में एक महत्वपूर्ण हथियार के रूप में तेजी से उभर रहा है. भारत आतंकवाद एवं चरमपंथ से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है.'

उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद से निपटने के लिए जो प्रणाली अपनाई है, वह बातचीत, लोकतांत्रिक, राजनीतिक प्रक्रियाओं और कानून के शासन को प्राथमिकता देती है और इसी दायरे में रहकर उससे निपटा जाता है.

शिंदे ने मुंबई में 1993 हुए इन श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों एवं 2008 के हमलों को एकसमान बताया. गृहमंत्री ने कहा कि अमेरिका में हुए 9/11 एवं मुंबई हमलों से यह मालूम होता है कि आतंकवादी अंतरदेशीय योजना बना रहे हैं.

उन्होंने कहा, 'चाहे 1993 के मुंबई बम धमाके हों, 26/11 का मुंबई आतंकवादी हमला या अमेरिका में हुआ 9/11 का आतंकवादी हमला हो, इन सभी को अंजाम देने के लिए रची गई साजिश ने खुफिया एजेंसियों में सहयोग और समन्वय बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया है.'

शिंदे ने हिंसक चरमपंथ एवं आतंकवाद को प्रमुख वैश्विक चुनौती बताते हुए चेतावनी दी कि आतंकवाद अपने तौर तरीकों एवं विषय वस्तु से लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण व्यवस्था को चोट पहुंचा रहा है.

उन्होंने कहा, 'यह बहुलवाद एवं बहुसंस्कृतिवाद को चोट पहुंचाता है.'

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शिंदे ने कहा, 'विश्वसनीय खुफिया सूत्रों से पता चला है कि आतंकवादी फर्जी कंपनियों के माध्यम से शेयर बाजार में अपना पैसा लगा रहे हैं, नकली कारोबार शुरू कर रहे हैं और कालेधन को वैध बना रहे हैं. ऐसे धन तथा जाली नोट के स्रोतों और उनके तौर-तरीकों का पता लगाना तथा इसके प्रवाह को रोकना बहुत महत्वपूर्ण है और इंटरपोल इसमें अहम भूमिका निभा सकता है.'

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