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कारगिल में 2016 तक बनेगा बड़ा हवाईअड्डा

वायुसेना ने 1999 में पाकिस्तान के साथ कारगिल में हुए युद्ध के दौरान हासिल अनुभवों से सीख लेते हुए कारगिल हवाईक्षेत्र को 2016 तक एक सम्पूर्ण अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है.

वायुसेना ने 1999 में पाकिस्तान के साथ कारगिल में हुए युद्ध के दौरान हासिल अनुभवों से सीख लेते हुए कारगिल हवाईक्षेत्र को 2016 तक एक सम्पूर्ण अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है.

वायुसेना का लक्ष्य इस हवाईअड्डे से मध्यम एवं भारी मालवाहक विमानों का संचालन करने का है. वायुसेना की योजना कारगिल से कुछ समय बाद लड़ाकू विमानों के संचालन की भी है.

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल नॉरमन अनिल कुमार ब्राउन ने आठ अक्टूबर को वायुसेना दिवस के आयोजन से पहले वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वायुसेना की योजना कारगिल हवाईअड्डे की 6000 फुट की हवाईपट्टी (रनवे) को विस्तारित करने की है. ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि यहां से सोवियत दौर के भारी मालवाहक विमान आईएल-76, अमेरिका से मंगाए जा रहे नए भारी मालवाहक विमान सी-17 तथा सेना को हाल ही प्राप्त सी-130जे सुपर हर्क्‍यूलस विमानों का संचालन किया जा सके.

ज्ञात हो कि 1999 में हुए कारगिल युद्ध के समय से ही जम्मू एवं कश्मीर के उत्तरी हिस्से में स्थित कारगिल हवाईक्षेत्र से सोवियत दौर में निर्मित मध्यम भारवहन क्षमता के एएन-32 विमानों का संचालन किया जा रहा है. जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने 1996 में इस हवाईक्षेत्र को नागरिक उड्डयन के लिए सक्रिय किया था. कारगिल युद्ध तक यह हवाईक्षेत्र भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण के अधीन था.

वायुसेना उसी समय से इस हवाईक्षेत्र से एएन-32 विमानों का संचालन करती आ रही है. इसके अलावा जम्मू एवं कश्मीर सरकार इसका उपयोग पर्यटक विमानों के लिए भी कर रही है. वायुसेना प्रमुख ने कहा कि चूंकि कारगिल वायुसेना अड्डे को उन्नत बनाने की योजना है, वह चाहेंगे कि वहां से लड़ाकू जेटों का संचालन भी हो लेकिन अभी इसमें वक्त लगेगा.

ब्राउन ने कहा कि वायुसेना की योजना चीन की सीमा से लगते जम्मू एवं कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में स्थित न्योमा हवाईअड्डे को लड़ाकू अड्डे के रूप में विकसित करने की भी है. इन योजनाओं को रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी अनुमोदित कर चुके हैं. उन्होंने कहा, 'न्योमा योजना अंतिम अनुमोदन के लिए जल्द ही सुरक्षा सम्बंधी कैबिनेट कमेटी को भेजी जाएगी.'

वायुसेना के इन अड्डों के विकास की भारतीय वायुसेना की इस योजना को उत्तरी एवं पूर्वोत्तर भारत में उसके ढांचागत विकास के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है. न्योमा में पहले से ही 12,000 फुट की हवाईपट्टी है तथा वायुसेना का अड्डा 13,300 फीट की ऊंचाई पर है. यहां से इस समय हेलीकॉप्टरों के अलावा एएन-32 विमानों का संचालन किया जा रहा है.

ब्राउन ने कहा, 'हम न्योमा को एक ऐसे अड्डे के रूप में विकसित करना चाहते हैं, जहां से हम लड़ाकू, मालवाहक विमानों तथा हेलीकॉप्टरों का संचालन कर सकें. एक बार ये सुविधाएं शुरू हो जाने पर हम नए सिरे से रक्षात्मक एवं बचाव अभियान शुरू कर सकते हैं.

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