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फिर से लिखी जाएगी कारगिल की कहानी

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने 1999 के कारगिल संघर्ष के दौरान सेना के नेतृत्व पर सवालिया निशान लगाते हुए एक पूर्व ले. जनरल को उस ब्रिगेडियर के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने का दोषी ठहराया है जिनकी अगुवाई में कई महत्वपूर्ण कामयाबी मिली थी.

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने 1999 के कारगिल संघर्ष के दौरान सेना के नेतृत्व पर सवालिया निशान लगाते हुए एक पूर्व ले. जनरल को उस ब्रिगेडियर के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने का दोषी ठहराया है जिनकी अगुवाई में कई महत्वपूर्ण कामयाबी मिली थी.

न्यायाधिकरण के अनुसार पूर्व ले जनरल ने पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर न केवल उस ब्रिगेडियर की उपलब्धियों को कमतर कर आंका बल्कि यु़द्ध का गलत विवरण भी दिया. सेना को शर्मसार करने वाले इस फैसले में न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया है कि ब्रिगेडियर (अवकाशप्राप्त) देविन्दर सिंह की सांकेतिक प्रोन्नति पर विचार किया जाना चाहिए.

यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब कारगिल संघर्ष के दौरान बटालिक सेक्टर में 70 इंफेंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व करने वाले सिंह ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर शिकायत की थी कि संघर्ष के दौरान उनके प्रदर्शन को गलत तरीके से पेश किया गया.

उल्लेखनीय है कि न्यायाधिकरण के पास सिंह की शिकायतों के समान ही कई याचिकाएं लंबित हैं. तत्कालीन जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी) ले. जनरल किशन पाल की रिपोर्ट का खामियाजा सिंह को भुगतना पड़ा था. उन्हें न सिर्फ पदक से वंचित रहना पड़ा बल्कि मेजर जनरल पद पर उनकी प्रोन्नति भी नहीं हो सकी थी. अपने लंबे संघर्ष को याद करते हुए सिंह ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आरोपों की पुष्टि हो गई है. उन्होंने कहा कि इस क्रम में कई बाधाओं को दूर करना पड़ा.

ब्रिगेडियर सिंह (अवकाशप्राप्त) ने कहा, ‘न्यायाधिकरण के आदेशानुसार मेजर जनरल पद पर सांकेतिक प्रोन्नति के लिए विचार किया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान संघर्ष से संबंधित दस्तावेतों को भी दुरूस्त किया जाएगा.

उनकी याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायाधिकरण की प्रधान शाखा को हस्तांतरित कर दिया था. सिंह ने अपनी याचिका में ले. जनरल पाल द्वारा लिखी गई रिपोर्ट पर आपत्ति की थी और उसमें सुधार किए जाने की मांग की थी.

उन्होंने कहा था कि रिपोर्ट में एक अन्य अधिकारी को तरजीह दी गई और उनकी उपलब्धियों को कमतर दिखाने का प्रयास किया गया. उन्होंने कहा कि इस कारण उन्हें काफी नुकसान हुआ. न्यायाधिकरण ने सेना से ब्रिगेडियर सिंह के संबंध में ले. जनरल पाल द्वारा लिखी गई सभी रिपोर्ट हटाने को भी कहा है.

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