केंद्र ने कहा कि उसे संसद के शीतकालीन सत्र में न्यायिक जवाबदेही विधेयक के पारित होने की उम्मीद है. इस विधेयक में न्यायाधीशों के खिलाफ जनता की शिकायतों से निपटने समेत अन्य बातों का प्रावधान है.
विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने यहां कहा, ‘हम न्यायिक जवाबदेही विधेयक तैयार कर रहे हैं और अगर यह संभव हुआ तो हम चाहेंगे कि संसद के अगले सत्र में यह पारित हो जाए.’ उन्होंने कहा कि उनकी सरकार चुनाव सुधार के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करने का प्रयास करेगी और निर्धारित अवधि के भीतर संसद में इसे पारित करेगी.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच अक्तूबर 2010 को न्यायिक मानदंड एवं जवाबदेही विधेयक, 2010 को हरी झंडी दे दी थी. इसके जरिए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को उच्चाधिकार समिति की जांच के दायरे में लाया जाएगा और कदाचार के गंभीर आरोपों का सामना करने वाले न्यायाधीशों से पद से इस्तीफा देने को कहा जा सकता है.
विधेयक में पांच सदस्यीय पर्यवेक्षण समिति के गठन का प्रावधान है जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधान न्यायाधीश करेंगे और इसमें अटार्नी जनरल भी शामिल होंगे. यह समिति उच्चतर न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ शिकायतों की जांच करेगी. इस समिति में उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के एक मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत एक प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होंगे.
यह विधेयक न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की जगह लेगा. इसे न्यायाधीशों के खिलाफ कदाचार के आरोपों की बढ़ती संख्या के बीच संसद में पेश किया जाएगा.
विधेयक में जांच समिति के गठन का प्रावधान है जिसे पर्यवेक्षण समिति मामले भेजेगी.