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भ्रष्ट को बचाने में संकोच नहीं करती सरकारः आडवाणी

नोट के बदले वोट मामले में भाजपा के पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा तथा अपने पूर्व सहयोगी सुधींद्र सिंह कुलकर्णी को जेल भेजे जाने से नाराज़ पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि सरकार को भ्रष्ट मंत्रियों को बचाने, लेकिन पोल खोलने वालों को जेल में डालने में संकोच तक नहीं होता.

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लालकृष्ण आडवाणी
लालकृष्ण आडवाणी

नोट के बदले वोट मामले में भाजपा के पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा तथा अपने पूर्व सहयोगी सुधींद्र सिंह कुलकर्णी को जेल भेजे जाने से नाराज़ पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि सरकार को भ्रष्ट मंत्रियों को बचाने, लेकिन पोल खोलने वालों को जेल में डालने में संकोच तक नहीं होता.
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आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ‘दिसंबर, 2001 में विधि आयोग ने अपनी 179वीं रिपोर्ट में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सुरक्षा देने के लिए कानून बनाने की मजबूती से अनुशंसा की थी. आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बी पी जीवन रेड्डी द्वारा तैयार की गई 113 पृष्ठों की इस रिपोर्ट की शुरूआत तत्कालीन विधि मंत्री अरुण जेटली को संबोधित एक पत्र से थी.’
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भाजपा नेता के मुताबिक, इस पत्र में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा गया था कि भ्रष्टाचार के प्रति देश का रुख ‘जीरो टॉलरेंस’ वाला होना चाहिए. इस रिपोर्ट में ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में पोल खोलने वालों को दी जाने वाली सुरक्षा का भी जिक्र किया गया था.
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आडवाणी ने लिखा है, ‘इस रिपोर्ट के आधार पर मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल ने पोल खोलने वालों की सुरक्षा के लिए एक विधेयक को स्वीकृति दी, जिसे तत्कालीन कार्मिक मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने 2010 में औपचारिक तौर पर लोकसभा में पेश किया. वर्तमान में इस विधेयक पर संसद की स्थाई समिति विचार कर रही है.’
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आडवाणी के मुताबिक, हालांकि यह विधेयक अब तक कानून की शक्ल नहीं ले सका है, लेकिन चूंकि मंत्रिमंडल ने इसे स्वीकृत कर दिया है, इसलिए सरकार को इसके बुनियादी सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता महसूस करनी चाहिए. भाजपा नेता ने लिखा, ‘पिछले सप्ताह मैं, अरुण जेटली के साथ तिहाड़ जेल में कुलकर्णी और दो पूर्व सांसदों कुलस्ते और भगोरा से मिला, जिन्होंने 2008 में इस बात का पर्दाफाश किया था कि किस तरह करोड़ों की रिश्वत के जरिए कांग्रेस नीत संप्रग-1 सरकार ने विश्वास मत हासिल किया था.’
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उन्होंने हिंदू अखबार में छपी विकीलीक्स रिपोर्ट पर आधारित उस खबर का भी हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि मनमोहन सरकार न न केवल सांसदों को खरीदने के लिए रिश्वत देने की प्रक्रिया में लिप्त थी, बल्कि उसने इस बारे में अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को भी जानकारी दी थी, ताकि अमेरिका को संप्रग सरकार के बचे रहने और भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के पूरा होने का आश्वासन दिया जा सके.

आडवाणी ने लिखा, ‘यह देख कर बहुत खराब लगता है कि सत्ताधारी पार्टी इन दिनों पूरा जोर भ्रष्ट मंत्रियों को बचाने में लगा रही है, पर उसे पोल खोलने वालों को जेल की सलाखों में डालने में कोई संकोच नहीं होता.’

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