केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के तौर पर पीजे को लेकर केंद्र सरकार घिरती नज़र आ रही है. के दौरान केंद्र से कई सवाल पूछे हैं.
कोर्ट ने पूछाः
1. पॉमोलीन घोटाला मामले में केरल हाईकोर्ट के फ़ैसले को अहमियत क्यों नहीं दी गई?
2. सचिव स्तर की नियुक्ति पर विज़िलेंस क्लियरेंस देने के लिए क्या केंद्रीय सतर्कता आयुक्त ही अंतिम अथॉरिटी है?
3. अगर थॉमस दावा करते हैं कि वो सियासत के शिकार हुए हैं तो उन्होंने मामले को ख़त्म कराने की मांग क्यों नहीं की?
4. अगर ये सियासी उठा-पटक का मामला था तो इतने सालों तक कोई अनुशासनात्मक जांच क्यों नहीं हुई?
सरकार ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि महज़ चार्जशीट फाइल होने से ये मतलब नहीं कि किसी के दामन पर हमेशा के लिए दाग़ लग गया, चयन समिति बहुमत से फ़ैसला लेती है. विपक्ष के नेता को अपनी राय रखने का हक है लेकिन इसका मतलब ये नहीं सरकार उसकी राय मानने को मजबूर है.